दस्तक में साहित्यकारों ने किया रचनापाठ

दस्तक में साहित्यकारों ने किया रचनापाठ

भोपाल ।  मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय और इकतारा संस्थान 27 सितम्बर से 29 सितम्बर, 2019 तक तीन दिवसीय 'दस्तक समारोह' में शुक्रवार रचना पाठ का आयोजन हुआ। रचनापाठ और संवाद अंतर्गत शुक्रवार को कार्यक्रम की शुरूआत अनिल सिंह ने 'बिजूका' और 'बंदरों की जल समाधि' कहानियां संग्रहालय सभागार में श्रोताओं को सुनाई। अनिल सिंह ने इस अवसर पर 'बिजूका' कहानी के माध्यम से गांव के जनजीवन को और उसकी उमंगों, हंसी-ठिठोली को बिंबित किया और बंदरों की जल समाधि कहानी में आधुनिकता और वस्तुनिष्ठ होती दुनिया किस तरह स्वार्थ पर टिकी है कि बांध के पानी को छोड़े जाने के कारण जलमग्न जंगल में कैसे एक पेड़ पर बंदरों का एक झुंड फंसा रहा और उन्हें बचाने कोई नहीं जाता। आखिर में वह वहीं मर जाते हैं। इसी क्रम में प्रभात ने रेवा और पलाश की कहानी सुनाई। रेवा और पलाश दोनों स्कूल में पढ़ते हैं, रेवा जहां छठवीं में है तो वहीं पलाश 8वीं में है। इस कहानी में रेवा के जीवन में आने वाली परेशानियों को लेखक ने कहानी में बड़े रोचक अंदाज से प्रस्तुत किया है। इसके पश्चात तेजी ग्रोवर ने एक कविता, कुछ जापानी अनुवाद और एक गद्य सभागार में मौजूद श्रोताओं को सुनाए। इसके बाद उदयन वाजपेयी ने 'घुड़सवार' कहानी सुनाई। यह कहानी राजा- रानी के पुत्र पर केंद्रित है। राजा-रानी राजकुमार से बहुत परेशान हैं, क्योंकि वह कभी भी एक जगह नहीं टिकता। जहां उसका मन जाता है, वह भी वहीं दौड़कर चला जाता है। राजकुमार कभी राजा तो, कभी रानी, कभी सरोवर किनारे, कभी उद्यान में और इस तरह पूरे दिन भागदौड़ के बाद थककर सो जाता है। आखिर में उसके पिता राजकुमार के लिए एक घोड़ा खरीदते हैं जो हवा से भी तेज भागता है। अब राजकुमार उसी पर बैठकर हर जगह कभी जंगल तो कभी पहाड़ तो कभी गांव-गांव भटकते घूमते हैं। इसके बाद स्वयं प्रकाश ने 'बिछड़ने से पहले' शीर्षक की कहानी श्रोताओं को सुनाई। इस कहानी में नई सड़क बनने के कारण पगडंडी और खेत के बिछड़ने और उनके बीच होने वाले मार्मिक संवाद को लेखक ने कहानी माध्यम से पढ़कर श्रोताओं को सुनाया। आखिर में राजेश जोशी ने बच्चों पर लिखी अपनी कविताएं श्रोताओं को सुनाई, जिनमें 'कौआ कितना काला है' खास रही।