बैले में जीवंत की पंचतंत्र की कहानी

बैले में जीवंत की पंचतंत्र की कहानी

भोपाल। कौवे और चूहे की दोस्ती, जंगल के जानवरों और पक्षियों के बीच प्रेम को कलाकारों ने मुखौटे, कॉस्ट्यूम, रिदम और एक्सप्रेशन के जरिए मंच पर जीवंत किया गया। यह नजारा था बुधवार को शहीद भवन में रंगश्री लिटिल बैले ट्रुप के कलाकारों के पंचतंत्र बैले के प्रदर्शन का।

चिड़ियों की रानी बनती थीं गुलदी

शांतिबर्धन की नृत्य परिकल्पना और कोरियोग्राफी की और पशु पक्षियों की मुद्राओं, देहगतियों और अंग संचालन का बेजोड़ नमूना यहां पर दिखाया। पंचतंत्र बैले में गुल दी कबूतर के राजा और चिड़ियों की रानी का किरदार निभाती थीं। उनके इस किरदार को बुधवार को बैले में दूसरे कलाकार ने निभाया। बैले में दिखाया गया कि किस तरह जाल में फंस जाने पर कबूतर को चूहा जाल कुतरकर मुक्त कराता है। इस तरह उनकी दोस्ती हो जाती है। तभी कौवा चूहे के सामने दोस्ती का प्रस्ताव रखता है। चूहा पहले तो मना करता है, लेकिन बाद में मान जाता है। जंगल में तूफान जाता है। कौवा चूहे को पीठ पर बैठाकर सुरक्षित जगह ले जाकर उसकी जान बचाता है और दोस्ती का फर्ज अदा करता है। कलाकारों के बीच बेहतर तालमेल और जानवर, पक्षियों की कॉस्ट्यूम ने पंचतंत्र की कहानी को किताबों से निकालकर मंच पर जीवंत कर दिया।