‘माँ’ ने 50 कश्मीरी युवाओं को छुड़ाया आतंका का रास्ता

‘माँ’ ने 50 कश्मीरी युवाओं को छुड़ाया आतंका का रास्ता

श्रीनगर। कश्मीर में इंडियन आर्मी की 15वीं कोर की पहल ‘आॅपरेशन माँ’ का असर दिखने लगा है। इसके कारण 2019 में 50 कश्मीरी युवक आतंक का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। इस आॅपरेशन की शुरुआत पंद्रहवीं कोर के प्रमुख लेμिटनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लों ने की। इसमें सबसे पहले लापता युवकों को खोजने और उनके परिजन तक पहुंचने की कवायद की गई। सेना की 15वीं कोर को चिनार कोर भी कहा जाता है। कोर ने घाटी और नियंत्रण रेखा पर आतंकवाद से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेμिटनेंट जनरल ढिल्लों ने कहा‘ पवित्र कुरान में माँ का महत्व समझाते हुए कहा गया है कि पहले अच्छे काम करो , फिर अपनी माँ की सेवा करो, फिर अपने पिता के पास जाओ। इसी से मुझे भटके हुए नौजवानों को उनके परिवार तक पहुंचाने में मदद मिली।’ अभिभावकों की पहचान गुप्त रखते हुए उनके संदेश दिखाकर जनरल ढिल्लों ने उन्हें घाटी का मूल्यवान तोहफा कहा।

मुठभेड़ के दौरान आतंकी से कराते हैं उसकी माँ की बात

जनरल ने बताया कि कुछ स्थानों मुठभेड़ ठीक बीच में रोककर भी आतंकवादियों का समर्पण कराया गया है। उन्होंने कहा, ‘स्थानीय आतंकी के सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में फंसने की सूचना मिलने पर हम उसकी माँ का पता लगाते हैं और दोनों की बातचीत कराने का प्रबंध करते हैं। कुछ मुठभेड़ों का अंत माँ- बेटे के करिश्माई मिलन से हुआ है और इस प्रकार सेना के प्रयासों से हमने कश्मीरी युवाओं की जान बचाई है। हमें शव गिनने का शौक नहीं है, बल्कि उन युवाओं की संख्या गिनना पसंद करते हैं, जिन्हें हमने उनके परिजनों से मिलवाया है। मैं प्रसन्न हूं कि इस साल 50 युवा अपने परिवार में वापस आ चुके हैं।’