मप्र: राज्य सभा की 3 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस का फोकस

मप्र: राज्य सभा की 3 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस का फोकस

भोपाल। अगले साल अप्रैल में राज्यसभा की मध्यप्रदेश कोटे की तीन सीटे खाली होने जा रही है। इस कोटे से राज्यसभा जाने के लिए दोनों ही दलों में खींचतान शुरू हो गई है। इस पर कब्जा करने के लिए सत्तारुढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा में कवायद शुरू हो गई है। अभी भाजपा के पास 2 और कांग्रेस के पास एक सीट है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर देखा जाए तो अब समीकरण बदल गए हैं। यानी कांग्रेस को दो और भाजपा के पास एक सीट मिल सकती है। फिलहाल मप्र से राज्यसभा सदस्यों की संख्या 11 है। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा के प्रभात झा व सत्यानारायण जटिया का कार्यकाल अप्रैल को खत्म होने जा रहा है। 3 सीटों पर चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। स्पीकर एनपी प्रजापति ने विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह को रिटर्निंग अफसर नियुक्त करने के लिए चुनाव आयोग को सूचना भेज दी है। इस सप्ताह अधिसूचना जारी हो सकती है।

दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रबल दावेदार

कांग्रेस में दावेदारों की लंबी लाइन है। वर्तमान में सदस्य दिग्विजय सिंह के अलावा सबसे मजबूत दावेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की बताई जा रही है। पार्टी उनको राज्य सभा भेजने का मन बना चुकी है। हालांकि, अंतिम निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व को ही लेना है। बताया जा रहा है कि सीएम कमल नाथ दिग्विजय के नाम पर सहमति जता सकते हैं, लेकिन इस रेस में पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और मुख्यमंत्री कमल नाथ के लिए विधानसभा की सीट रिक्त करने वाले दीपक सक्सेना के नामों पर भी कांग्रेस विचार कर सकती है।

कांग्रेस के लिए राज्य सभा की राह आसान

प्रदेश में रिक्त होने वाली तीन सीटों में से भाजपा के पास दो और कांग्रेस के पास एक सीट है, लेकिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद संख्या बल में बदलाव हो गया है। विधानसभा की मौजूदा सदस्यों की संख्या के मुताबिक कांग्रेस की राह आसान दिख रही है। राज्य सभा सदस्यों के चुनाव में प्रत्याशी को जीत के लिए 58 विधायकों के वोटों की जरूरत होती है। कांग्रेस के पास अभी 114 विधायक हैं, लेकिन कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के मंत्रिमंडल में एक निर्दलीय विधायक है। तीन निर्दलीय कांग्रेस विचारधारा के हैं और सरकार को समर्थन भी दे रहे हैं। इसी तरह बसपा के दो और सपा का एक विधायक भी कमलनाथ सरकार को समर्थन कर रहे हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के पास 121 विधायकों का समर्थन है। वहीं, भाजपा के 108 विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस के दो प्रत्याशियों की राज्यसभा चुनाव में जीत आसान है। इधर, हालांकि पथरिया से बसपा विधायक रामवती बाई को पार्टी ने निलंबित कर दिया है। इस चुनाव पर इसका असर पर पडेगा।

प्रभात झा को फिर उम्मीद, विजयवर्गीय भी दौड़ में

राज्यसभा सदस्य की कतार में भाजपा में दावेदारों की कमी नहीं है। मौजूदा सांसद प्रभात झा तीसरी बार राज्यसभा जाना चाहते हैं, तो वहीं, पार्टी के दूसरे नेताओं की दावेदारी भी प्रबल बताई जा रही है। इस बार राष्टÑीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी दौड़ में शामिल है। इसके अलावा महाकौशल से राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व महाधिवक्ता रविनंदन सिंह का नाम भी चर्चा में है। कुछ आदिवासी नेता भी दौड़ में है। एक गुट आदिवासी नेता को सदस्य बनाना चाह रहा है। इसके अलावा चंबल से एससी कोटे से आने वाले लालसिंह आर्य का नाम भी चर्चा में है। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने नामों पर विचार करना शुरू कर दिया है।