मप्र को फिर एक बार मिल सकता है ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा

मप्र को फिर एक बार मिल सकता है ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा

भोपाल ।   मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का खोया हुआ दर्जा एक बार फिर वापस मिल सकता है। 29 जुलाई को बाघ दिवस पर जारी होने वाली टाइगर सेंसस में इसकी घोषणा हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह रिपोर्ट जारी करेंगे। प्रदेश में पिछले साल हुई गणना में 355 बाघों की पुष्टि हुई थी। इसकी प्राथमिक विश्लेषण रिपोर्ट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून को पिछले साल ही भेज दी थी। इस संस्थान के विश्लेषण के बाद प्रदेश में बाघों की संख्या का आंकड़ा 400 से पार जाने की संभावना है। उस समय की टाइगर सेंसेस में मप्र में 305 बाघ पाए गए थे। कर्नाटक सर्वाधिक बाघ के साथ पहले नंबर पर था। पिछले साल पूरे प्रदेश में एक साथ कराई गई गणना में 9000 में से 1432 बीट में बाघों की मौजूदगी पाई गई है।

रातापानी अभ्यारण्य में सबसे ज्यादा संख्या

नेशनल पार्क के बाहर सबसे ज्यादा बाघों की संख्या रातापानी अभ्यारण्य में पाई गई है। इनमें बांधवगढ़ में बाघों की संख्या 100 से ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है। इसी तरह कान्हा नेशनल पार्क के पालाघाट के जंगलों में बाघों की संख्या 30 के आसपास पाई गई है।

गणना में शावकों की संख्या शामिल नहीं

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मप्र के जंगलों में कैमरा ट्रैपिंग से ली गई रिपोर्ट में 355 बाघों के चित्र आए हैं। यानि विश्लेषण में ये स्पष्ट हो गया है कि 355 बाघ पूरी तरह से अलग-अलग हैं। इनमें शावकों की संख्या शामिल नहीं है।

सतना, देवास,बिरसिंहपुर तथा दतिया में भी दिखे हैं बाघ

इन अधिकारियों का कहना है कि इस बार बाघों की मौजूदगी उन क्षेत्रों में सामने आई है, जिनमें बाघों कभी नहीं दिखाई दिए। इनमें सतना, देवास,दतिया तथा बिरसिंहपुर जैसे अन्य जिले शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि नेशनल पार्क, सेंचुरी के कोर और बफर जोन के अलावा अन्य वन क्षेत्रों में भी बाघों की गणना की गई थी और उन्हें कैमरे में भी कैद किया गया है।