बालाघाट-सिंगरौली में नक्सली दलम अब कैम्प लगाने की तैयारी में!

बालाघाट-सिंगरौली में नक्सली दलम अब कैम्प लगाने की तैयारी में!

जबलपुर । नए कॉरीडोर तैयार करने के बाद बालाघाट से लेकर सिंगरौली तक अब नक्सली दलम गांवों में कैम्प लगाने की तैयारी में जुट गए हैं। खुफिया तंत्र की रिपोर्ट के बाद पुलिस भी सक्रिय हो गई है। बालाघाट तथा शहडोल जोन की पुलिस ने कॉम्बिंग सर्च तेज कर दी है तथा मुखबिरों को भी तंत्र से जोड़ रखा गया है। उल्लेखनीय है कि बारिश शुरु होते ही नक्सली दलमों ने अपनी गतिविधियों को नया रूप देना शुरू कर दिया है। आंध्रप्रदेश से आई नक्सलियों की नई खेप से सेन्ट्रल कमेटी ने प्लाटून-56 को अस्तित्व में लाकर नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। नक्सली दलम बारिश के मौसम में गांवों को अपना ठिकाना बनाकर कैम्प करते हुए जल्द ही नई टीम को प्रशिक्षण देने की तैयारी में हैं।

कई गांवों को किया गया चिन्हित

बालाघाट, मण्डला, डिण्डौरी, शहडोल तथा सिंगरौली के घने जंगलों से लगे कई गांवों को चिन्हित करते हुए नक्लसी दलम यहां ठिकाना तलाश रहे हैं। नक्सलियों की कोशिश है कि बारिश के दिनों में वारदातों को अंजाम देने के बजाए सायादार स्थलों पर सुरक्षित तरीकों से प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएं। नक्सलियों द्वारा अपनी ओर आकर्षण पैदा करने संबंधी पोस्टर पहले ही जंगलों में चस्पा किए जा चुके हैं।

2012 के बाद फिर लौटे

जानकारों का कहना है कि सात साल पूर्व मई 2012 में पचामा- दादर में हुई नक्सली मुठभेड़ के बाद सभी दलमों ने मण्डला तथा डिण्डौरी के क्षेत्रों को त्याग दिया था। छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र बॉर्डर क्षेत्र में दबाव बढ़ने के बाद नक्सली दलम फिर यहां लौट कर सक्रिय हो रहे हैं। नक्सली दलम क्षेत्रीय लोगों में अपनी घुसपैठ बढ़ाते हुए नेटवर्क दुरुस्त करने में भी लगे हैं।

पुलिस हर दिन का ले रही फीडबैक

पुलिसिया खुफिया तंत्र के अलावा मुखबिरों के जरिए हर रोज पुलिस अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों से फीडबैक ले रहे हैं। कोयनार दलम के सदस्यों को इसमें सबसे शातिर माना जा रहा है और उपलब्ध एलबम के आधार पर गांवों में इनकी तलाश भी की जा रही है। पुलिस की यह पूरी कार्रवाई काफी गोपनीय तरीके से चल रही है।