बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत : बादल

बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत : बादल

ग्वालियर । आज शासन-प्रशासन ने जिस प्रकार से बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर का जन्मदिन मनाने के लिए प्रतिबंधित किया है, वह उनके डर को बताता है। हमें आज डॉ. अम्बेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि जातिवाद की जंजीरों को तोड़ा जा सके। यह विचार अभा किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव बादल सरोज ने रविवार को मानस भवन में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और दलित शोषण मुक्ति मंच द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती पर ‘संविधान पर बढ़ते खतरे और चनौतियां’ विषय पर आयोजित सेमीनार में व्यक्त किए। बादल सरोज ने कहा कि आज शासन-प्रशासन को डॉ. अम्बेडकर के विचारों से डर लगता है, क्योंकि समाज में व्याप्त गैर बराबरी को उन्होंने खत्म करने के लिए संविधान में लिखित प्रावधान किए थे। इसलिए मनु स्मृति को संविधान मानने वाले आज सत्ता पर काबिज होने के बाद बाबा साहब के संविधान को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। सरोज ने कहा कि आज देश में 65 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं, उनको भरने की बात न कर ये सरकार जाति, धर्म और राष्ट्रवाद की बात कर आम जनता को मुद्दों से भटकाना चाहती है। आज देश की बागडौर पूरी तरह पूंजीपतियों के हाथों में हैं और देश के प्रधानमंत्री उनका ही काम कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण पहली बार बीएसएनएल के 1 लाख 35 हजार कर्मचारियों का वेतन का रूक जाना है। इसलिए बाबा साहब की लड़ाई बाबा साहब के विचारों और मार्क्स के विचारों के साथ ही लड़ा जा सकता है। इस दौरान सीटू के प्रदेशाध्यक्ष रामविलास गोस्वामी, जिलाध्यक्ष शेखगनी, दलित शोषण मुक्ति मंच के संरक्षक प्रवीण गौतम, रामबाबू जाटव, अभा जनवादी महिला समिति से प्रीति सिंह, डिक्टी से मनीषा सोनी, समाजसेविका सुनीता गौतम ने विचार रखे। अध्यक्षता सोहनलाल चौधरी और गीता जाटव ने की। संचालन अनिल मौर्य ने किया।