गुरूद्वारे की मदद से जरूरतमंदों तक पहुंचाया लंगर का खाना

गुरूद्वारे की मदद से जरूरतमंदों तक पहुंचाया लंगर का खाना
गुरूद्वारे की मदद से जरूरतमंदों तक पहुंचाया लंगर का खाना

I AM BHOPAL कोरोना के कारण शहर में लॉकडाउन है। ऐसे में कुछ लोगों को खाने के लिए भोजन तक नहीं मिल पा रहा है। शहर के फुटपाथों पर रहने वालों को भी खाना नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में शहर के कुछ समाजसेवी इन दिनों दो टाइम का भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। सोशल वर्कर प्रशांत दुबे ने ऐशबाग की हिनोतिया बस्ती में फकीरी समुदाय को खाना बांटने के लिए खाना लेने एम्स के सामने वाले गुरुद्वारा गए। उन्होंने बताया इतने सम्मान, श्रद्धा और प्रेम से यह भोजन तैयार किया गया और हमें दिया गया कि मन सिख समुदाय की सेवा और स्नेह के प्रति कृतज्ञता से भर गया। बहुत जरूरी है ऐसे लोगों की कहानियों का सामने आना। कई युवा तो ओपन जीप में खाने का डिब्बा पैक कर इन लोगों को दे रहे हैं। कोरोना के कारण भले ही पूरे शहर में नाकाबंदी है, लेकिन 'आवाज' संस्था द्वारा पुलिस की इजाजत से खाने का वितरण किया जा रहा है।

30 परिवारों तक 100 फूड पैकेट्स की मदद

प्रशांत  ने बताया कि हमें एम्स स्थित गुरुद्वारा साहिब के प्रधान हरदीप सिंह सैनी ने गुरूद्वारे से करीब 100 पैकेट्स की मदद की है। कोरोना का एक और अप्रत्यक्ष रूप अब सामने आने लगा है। यानी व्यक्ति संक्रमित हो न हो, लेकिन यदि खाने-कमाने न जा पाएगा तो उसके क्या हाल होंगे। ऐशबाग में ऐसे लगभग 30 परिवार हैं जो फकीरी करते हैं, पन्नी बीनते हैं और बीनने-मांगने नहीं जा पा रहे हैं। हम इनके साथ काम करते हैं। इनके पास न राशन कार्ड है और न ही कोई और दस्तावेज। पिछले 4-5 दिनों से हमारी टीम अलग-अलग स्त्रोतों से इनके लिए खाने का जुगाड़ कर रही थी। अब हम इन परिवारों के लिए कच्चा राशन की जुगाड़ कर रहे हैं। चावल, दाल, आटा, तेल और मसाले। यदि 20 दिनों की जुगाड़ ही करनी पड़ी तो एक परिवार (4-5 सदस्य प्रति परिवार) को लगभग 10 किलो तुअर दाल , 25 किलो चावल, 10 किलो आटा, 2 लीटर तेल और एक मसाले का पैकेट (50 रुपए) देना है। यह किट लगभग 2000 की पड़ रही है। हम यही अपील करते है कि जो साथी सहयोग कर सकते हैं। आवाज की पूरी टीम प्रतिबद्ध है उस राशन को आपके पास से लेने और सही हाथों में पहुंचाने के लिए तत्पर तैयार रहेगी।