समिट की रस्म अदायगी करना काफी नहीं

समिट की रस्म अदायगी करना काफी नहीं

भोपाल ।  सिर्फ निवेश संबंधी योजनाएं बनाने और प्रचार के लिए सम्मेलन या समिट करने की रस्म अदायगी करना काफी नहीं है। इसमें राज्य के धन और अधिकारियों के कीमती समय तथा ऊर्जा के समुचित उपयोग और परिणाम पर ध्यान देना जरूरी है। मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए अनूकूल परिस्थितियों के चलते वास्तविक और संभावनाशील ऐसे निवेशकों से संवाद किया जाए, जो मप्र में निवेश में प्रामाणिक रुचि दिखाएं। यह बात मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आगामी अक्टूबर माह में प्रस्तावित निवेश समिट के स्वरूप और तैयारियों की समीक्षा करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशक सम्मेलन से पहले भी संवाद सत्रों का आयोजन कर प्रामाणिक निवेशकों की पहचान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि निवेश के नए क्षेत्रों, जैसे फार्मास्युटिकल रिसर्च और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि जीएसटी के नए दौर में निवेशकों की बदली हुई प्राथमिकताओं का ध्यान भी रखना होगा।

कई निवेशक हो गए दिवालिया

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिछली कई इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों ने जितनी राशि के निवेश का वादा किया था, उतना निवेश नहीं आया। बड़े निवेश का दावा करने वाले कुछ निवेशक समूह तो दीवालिया होने की स्थिति में पहुंच गए। अगंभीर निवेशकों से संवाद समय और धन की बर्बादी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश का अनुमान लगाने के बजाय ठोस धरातल पर बात कर आगे बढ़ना होगा। बैठक में वित्त मंत्री तरूण भानोट, मुख्य सचिव एसआर मोहंती, एसीएस वित्त अनुराग जैन, एसीएस वन केके सिंह, प्रमुख सचिव उद्योग डॉ. राजेश राजौरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।