अब 34 वार्डों में सफाई करने रखे जा रहे 26 करोड़ खर्च से 2 हजार सफाई कर्मी

अब 34 वार्डों में सफाई करने रखे जा रहे 26 करोड़ खर्च से 2 हजार सफाई कर्मी

जबलपुर   नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग 34 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए जल्द ही 2 हजार सफाई कर्मी ठेके पर तैनात करने जा रहा है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। दरअसल पूर्व में करीब 3 सालों से इनकी संख्या 12सौ थी और अब ठेका समाप्त हो रहा है,लिहाजा नए ठेके में कर्मचारियों की संख्या बढ़ा दी गई है। इससे ननि पर 10 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार भी आ रहा है। पूर्व में यह ठेका 14 करोड़ का था जो कि अब 26 करोड़ का होगा। नगर निगम यह ठेका एक ही ठेकेदार को देने जा रहा है जबकि एमआईसी का कहना है कि ठेके को टुकड़ों में अलग-अलग ठेकेदारों को दिया जाए। इस बात पर विगत दिनों हुई एमआईसी बैठक में तकरार भी हुई थी। एमआईसी के सदस्य अब इस बारे में अलग से बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं।

क्या है सफाई कर्मियों की स्थिति

सफाई कर्मियों की संख्या में कोई कमी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के पास अपने 12 सौ नियमित सफाई कर्मी हैं और 457संविदा सफाई संरक्षक हैं। इसके अलावा जिन वार्डों की सफाई पहले से ही ठेके पर चलती है ऐसे 41 वार्डों में 15 सौ तथा 38 वार्डों में 12 सौ कर्मी थे जिन्हें अब 2 हजार किया जा रहा है। इस हिसाब से स फाई कर्मचारियों की कुल संख्या 5 हजार से ऊपर होगी। इसके बावजूद शहर में सफाई की व्यवस्था कैसी है यह किसी से छुपी नहीं है।

एचओ बदले पर व्यवस्था नहीं

नगर निगम में ज्यादा आलोचना होने पर अफसर बदलने की स्वाभाविक परंपरा है। करीब 4 साल तक स्वास्थ्य अधिकारी रहे जीएस चंदेल को हटाकर उनकी जगह भूपेन्द्र सिंह को स्वास्थ्य अधिकारी बनाया गया है। श्री सिंह की कार्यप्रणाली अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है,क्योंकि व्यवस्था में कोई सुधार नजर नहीं आया है। सबसे बड़ी कमी नाले और नालियों की सफाई न होना है जिसके कारण शहर की बस्तियां गंदगी से अटी पड़ी हैं।

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन पर नियंत्रण नहीं

हर घर से कचरा उठाने के लिए नगर निगम ने भारी-भरकम रकम देकर एस्सेल कंपनी को ठेका दिया है मगर 3 साल होने के बावजूद इस कंपनी पर अपना नियंत्रण नहीं बना पाई है। नियम के मुताबिक हर रोज हर घर से कचरा उठना चाहिए मगर 3-3 दिन तक कचरा लेने वाली गाड़ियां नहीं पहुंचने से लोगों के घरों में कचरा जमा हो जाता है। दिखावे के लिए कभी-कभार कंपनी का भुगतान कुछ मामूली हिस्सा रोक लिया जाता है। प्रभावी कार्रवाई करने की दम आज तक नगर निगम या नगर सत्ता में नहीं हो पाई।

जलप्लावन का एकमात्र कारण नालों की सफाई न होना

इस बारिश में शहर की सैकड़ों बस्तियों में हुए जलप्लावन का एकमात्र कारण नालों की सही तरीके से सफाई न होना है। लाख आलोचनाओं के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने नालों को साफ करने की जहमत नहीं उठाई। दावे हर बार यही किए गए कि शहर के सभी बड़े छोटे नाले सौ फीसदी साफ कर लिए गए हैं।