अब ढाई मिनट में होगी ब्रेन ट्यूमर की पहचान

अब ढाई मिनट में होगी ब्रेन ट्यूमर की पहचान

न्यूयॉर्क ब्रेस्ट कैंसर के बाद अब ब्रेन ट्यूमर की पहचान भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से होगी। पहले पैथोलॉजिस्ट को लैब में इसकी पहचान करने में 30 से 45 मिनट का समय लगता था लेकिन अब एआई से इसकी पहचान ढाई मिनट से भी कम समय में हो सकेगी। अमेरिका के न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल आॅफ मेडिसिन और लैनगोन अस्पताल के वैज्ञानिकों का ये शोध हाल ही नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। प्रमुख शोधकर्ता और न्यूरोसर्जन डॉ. डेनियल ओरिंगर कहते हैं कि एक सर्जन एमआरआई या सीटी स्कैन में बहुत सीमित चीजें देख सकता है। कुछ ब्रेन ट्यूमर इतने जटिल होते हैं जिनकी पहचान बहुत मुश्किल होती है। एआई से ऐसे ट्यूमर को कम समय में पहचाना जा सकता है। वैज्ञानिकों को इस प्रक्रिया में लेजर लाइट का प्रयोग किया जो मस्तिष्क में ट्यूमर के चलते बिखर गई जिससे उस कैंसर की पहचान हो सकी।

सुरक्षित आॅपरेशन और सबसे बेहतर: एआई युक्त इमेजिंग टेक्नोलॉजी को स्टीम्युलेटेड रमन हिस्टोलॉजी नाम दिया है। इसकी विशेषता ये है कि पैथोलॉजी में जिस ट्यूमर उत्तकों की पहचान नहीं हो सकती है उसकी पहचान आासानी से हो सकेगी। भविष्य में इस तकनीक से कैंसर का आॅपरेशन सुरक्षित होगा।

अलग-अलग तरह के ट्यूमर पर शोध

वैज्ञानिकों ने 415 मरीजों के करीब 25 लाख सैंपल को कंप्यूटर न्यूरॉल नेटवर्क के हिसाब से तैयार किया और उसे 13 श्रेणियों में बांट दिया। इसमें मैलिंगनेंट ग्लियोमा, लिंफोमा, मेटास्टिक ट्यूमर और मेनिनजियोमा ट्यूमर शामिल थे। वहीं 278 रोगी जिनकी तीन अस्पतालों में ब्रेन सर्जरी होनी थी, उनके सैंपल को पैथोलॉजी लैब में भेज दिया तो कुछ को आॅपरेशन के दौरान प्रयोग के तौर पर होने वाली एआई जांच के लिए भेजा। अगर सैंपल की जांच के दौरान एआई का प्रयोग करें तो ब्रेन ट्यूमर की पहचान करने में समय कम लगेगा और इलाज सरल होगा।

इन लक्षणों को समय रहते पहचानें

* सिर में दर्द रहना, झटके आना

* बोलने में तकलीफ शुरू होना

* चलने-फिरने में दिक्कत होना

* अचानक से दिखाई देने में दिक्कत

* लड़खड़ाना, संतुलन न बन पाना