अब शहर में तीन जगह दर्ज होंगे मौसम के आंकड़े

अब शहर में तीन जगह दर्ज होंगे मौसम के आंकड़े

इंदौर ।  मानसून सत्र लौटने के कगार पर पहुंच गया है। सावन की तुलना में भाद्र पक्ष में मानसून की सक्रियता देखने लायक रही। भाद्र पक्ष में हुई बारिश से इंदौर का कोटा ही पूरा नहीं हुआ, बल्कि 2013 के बाद इस साल सबसे ज्यादा 48.42 इंच बारिश हुई है। 2013 में 55.66 इंच बारिश हुई थी। शहर में तीन सेंटरों पर बारिश दर्ज होती है। तीनों सेंटरों पर बारिश का रिकॉर्ड अलग-अलग दर्ज हुआ है। तीनों स्थानों से ली गई जानकारी के मुताबिक एयरपोर्ट सेंटर पर 48.42, रीगल चौराहा स्थित एसएसपी आॅफिस सेंटर पर 59 तथा कृषि कॉलेज सेंटर पर 51 इंच बारिश दर्ज है। तीनों सेंटरों के हिसाब से रीगल वाले सेंटर के अनुसार इस बार इंदौर में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। एक अन्य जानकारी के मुताबिक 1994 से 2019 के बीच 9 बार एक हजार एमएम से ज्यादा बारिश हुई है।

मानसून विदाई बेला की ओर

मानसून अब धीरे-धीरे विदाई को ओर अग्रसर हो रहा है। पश्चिम बंगाल के तटीय इलाके से उठे चक्रवात की वजह से भादवा के बाद अब आश्विन की बारिश चल रही है। प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, वहीं कुछ जिलों में बारिश का दौर जारी है। इंदौर में शुक्रवार को रिमझिम तो शनिवार की शाम तेज बारिश हुई। रविवार को मौसम खुला रहा। मौसम विभाग के मुताबिक 30 सितंबर तक मानसूनी बारिश का दौर जारी रहेगा। इसके बाद मानसून की लगभग विदाई हो जाएगी। धूप नहीं निकलने तथा रुक-रुककर हो रही बारिश से शहर और ग्रामीण एरिया में मौसम ठंडा बना हुआ है।

एसएसपी आफिस में भी रेन रिकॉर्ड

बारिश सिस्टम जानकारी के मुताबिक शहर में एयरपोर्ट और कृषि कॉलेज में रेन रिकॉर्ड सिस्टम से बारिश का आंकड़ा लिया जाता था, लेकिन पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने दो माह पहले रेन रिकॉर्ड सिस्टम रीगल चौराहा स्थित एसएसपी आॅफिस में भी लगा दिया है। यहां भी शहर की बारिश दर्ज की जा रही है। इस तरह इंदौर में तीन सेंटरों पर बारिश का रिकॉर्ड दर्ज होने लगा है। एसएसपी आॅफिस वाले सेंटर में बारिश 59 इंच दर्ज की गई है। इस हिसाब से इंदौर में 1994 के बाद सबसे ज्यादा बारिश हुई है।

2013 के बाद हुई सबसे अधिक वर्षा

मौसम विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक इस मानसून सत्र में अभी तक 1229.9 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, जबकि 2013 के मानसून सत्र के दौरान 1419.6 मिमी यानि 55 इंच बारिश हुई थी। यह रिकॉर्ड टूटना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि मानसून की विदाई शुरू हो चुकी है। इसी प्रकार 1994 से 2019 यानि 25 साल में 9 मानसून सत्र ऐसे रहे, जिनमें 1000 एमएम से ज्यादा बारिश हुई है।