आदिवासी परिवारों को साहूकारों के कर्ज से मुक्ति देने आएगा अध्यादेश

आदिवासी परिवारों को साहूकारों के कर्ज से मुक्ति देने आएगा अध्यादेश

भोपाल ।  राज्य सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी परिवारों को गैर लाइसेंसी साहूकारों के कर्ज से मुक्ति देने के लिए अध्यादेश लायेगी। इस संबंध में मंगलवार को यहां जनाधिकार कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अध्यादेश के मुख्य प्रावधानों की जानकारी कलेक्टरों को दी गई। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान सिर्फ बड़े जिलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला स्तर पर निराकृत होने वाली शिकायतें हर हाल में जिला स्तर पर ही हल हो जानी चाहिए। सीएम ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय परिवारों पर साहूकारी ऋण विमुक्ति अध्यादेश लाया जाएगा। इसके अनुसार 15 अगस्त 2019 तक जनजातीय बंधुओं पर साहूकारों के जितने कर्ज हैं सबसे उन्हें मुक्ति मिल जाएगी। उनकी गिरवी रखी सम्पत्ति भी उन्हें वापस मिल जाएगी। ऐसे परिवारों पर जो बकाया कर्ज है उसकी जबरन वसूली करने पर सजा और जुर्माना होगा। तीन साल की सजा होगी और एक लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ेगा। सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिलों केजनजातिये परिवारों और साहूकारों पर नजर रखें। कोई भी साहूकार जबर्दस्ती कर्ज वसूली न कर पाए। ऐसे गैर लाइसेंसी साहूकारों की जानकारी भी मंगाई जा रही है। इसके अलावा मध्यप्रदेश अनुसूचित क्षेत्रों में साहूकारी विनियम 1972 में संशोधन का अध्यादेश भी राष्टपति की स्वीकृति के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों का निराकरण संतोषजनक होना चाहिए।