महाकौशल कॉलेज को 25 विद्यार्थी नहीं मिले तो बंद होंगी ‘मनोविज्ञान’ की पीजी कक्षाएं

महाकौशल कॉलेज को 25 विद्यार्थी नहीं मिले तो बंद होंगी ‘मनोविज्ञान’ की पीजी कक्षाएं

जबलपुर। महाकौशल कॉलेज में जुलाई से होने वाले प्रवेश में सत्र 2019-20 में मनोविज्ञान विषय की पीजी कक्षाएं बंद होने की कगार पर हैं। इस मामले में कॉलेज प्रबंधन को निर्देश दे दिए गए हैं कि 25 से कम एडमिशन हुए तो विभाग बंद कर दिया जाएगा। कॉलेज में को-एजुकेशन होने से विषय बंद होने पर छात्रों के समक्ष पीजी करने का संकट खड़ा हो जाएगा। गौरतलब है कि मनोविज्ञान विषय रोजगारोन्मुखी है और इससे पीजी करने के बाद विद्यार्थियों को काउंसलर्स जैसे नियुक्तियां मिल जाती हैं। वहीं शासन के निर्णय के अनुसार जुलाई 2019 से शुरू होने वाले नवीन सत्र से एमए मनोविज्ञान नियमित करने वालों की संख्या बढ़नी चाहिए। इसके लिए विद्यार्थियों को एमए मनोविज्ञान नियमित करने प्रेरित किया जा रहा है। प्रबंधन की मानें तो 18 साल से इसे सेल फाइनेंस पर चलाया जा रहा है। जबकि नियमानुसार 5 साल में कोर्सेस नियमित होते हैं। व्यापक है मनोविज्ञान विषय शिक्षा, चिकित्सा, परिवार, समाज, कोई ऐसा क्षेत्र नही है जहां मनोविज्ञान की जरुरत नही है और दिनप्रतिदिन इसका महत्व बढ़ता जा रहा है। ऐसे में कोर्स बन्द करने से बहुत से विद्यार्थी रोजगार प्राप्त करने में भी असमर्थ होंगें।क्योंकि मनोविज्ञान ही एक ऐसा विषय है जहां आने वाले 2 वर्षों में काउंसलर्स की बेहिसाब जॉब्स आने वाली है इसका कारण सभी सीबीएसई स्कूलों में काउंसलर्स रखने की अनिवार्यता है।

विषय की है बहुत डिमाण्ड

मनोविज्ञान आज विश्व के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले विषयों में से एक विषय के रूप में स्थापित हो चुका है। भारत में भी आज इस क्षेत्र में रोजÞगार की असीम संभावनाएं हैं। राष्टय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-2016 के अनुसार देश की आबादी का 15 फीसदी वयस्क आज एक से ज्यादा मानसिक रोग का शिकार है और यह आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इन आंकड़ों के मुकाबले मनोवैज्ञानिकों की संख्या बहुत कम है। आगामी सत्रों से हर सीबीएसई स्कूल में एक मनोवैज्ञानिक रखा जाना अनिवार्य होगा और इसके लिए वेतन 20हजार से 45 हजार रुपए प्रतिमाह होता है, लेकिन इस पद के लिए एमए मनोविज्ञान अनिवार्य योग्यता होगी। ऐसे में रोजगार के रूप में मनोविज्ञान एक बेहतर कॅरियर विकल्प है।