सुब्रमण्यम की रिपोर्ट का अध्ययन करेगी प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद

सुब्रमण्यम की रिपोर्ट का अध्ययन करेगी प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के वर्ष 2011- 12 से लेकर 2016-17 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि अनुमान को बढ़ा-चढ़ाकर बताये जाने को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुये बुधवार को कहा कि वह इससे संबंधित रिपोर्ट का बिन्दुवार अध्ययन कर उसकी एक-एक बात का खंडन करेगी। परिषद ने कहा कि सुब्रमण्यम की इस रिपोर्ट को लेकर भारतीय मीडिया में खबरें आयी है, जिसमें वर्ष 2011-12 से लेकर 2016-17 के दौरान भारतीय जीडीपी को बढ़ा- चढ़ाकर बताये जाने की बात कही गयी है। उसने कहा कि इस रिपोर्ट में कोई तथ्य नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय आय लेखा को लेकर कई विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों के अनुरूप आधार वर्ष को बदलकर 2011- 12 किया गया है। परिषद ने बयान में कहा है कि वर्ष 2008 में जो सुझाव दिये थे सरकार ने उसे जनवरी 2015 में क्रियान्वित करना शुरू किया। इसलिए यह कहना गलत है कि आधार वर्ष बदलने या वार्षिक औद्योगिक सर्वेक्षण के स्थान पर कंपनी मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों का उपयोग करने के लिए विशेषज्ञों की सलाह नहीं ली गयी। इसमें कहा है कि श्री सुब्रमण्यम ने अपनी रिपोर्ट में भारत के जीडीपी का आंकलन करने के लिए क्रॉस कंट्री रिग्रेशन का उपयोग किया जबकि इसका उपयोग करना बहुत ही अव्यावहारिक है। पूर्व आर्थिक सलाहकार ने जिन छद्म संकेतों के उपयोग किये, वे भी सवालों के घेरे में आ सकते हैं। इस तरह की गणना में उत्पादकता में वृद्धि के आधार पर जीडीपी में बढ़ोतरी की अनुमति नहीं होती है। परिषद श्री सुब्रमण्यम की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन करेगी और इसके बाद बिन्दुवार उसका खंडन करेगी। इस तरह की रिपोर्ट से सनसनी पैदा नहीं की जानी चाहिए क्योंकि पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार भारतीय सांख्यिकी प्रणाली की गुणवत्ता और निष्पक्षता को पूरी तरह जानते हैं। उल्लेखनीय है कि सुब्रमण्यम की यह रिपोर्ट अमेरिका के एक विश्वविद्यालय ने प्रकाशित की है जिसमें उन्होंने कहा कि 2011-12 से 2016-17 के दौरान भारतीय जीडीपी वृद्धि दर को वास्तविक से 2.5 प्रतिशत बढ़ाकर बताया गया जबकि इस दौरान जीडीपी की वास्तविक विकास दर 4.5 प्रतिशत के आसपास रही है।