3 माह से गायब अपने 83 कर्मियों की तलाश में परेशान हो रहा रेलवे

3 माह से गायब अपने 83 कर्मियों की तलाश में परेशान हो रहा रेलवे

जबलपुर। रेलवे अपने 83 ऐसे कर्मियों की खोज कर रहा है जो 3 माह से ज्यादा समय से लापता हैं। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल से 83 कर्मचारी पिछले 3 माह या उससे अधिक समय से लापता हैं। इतने दिनों से नौकरी पर नहीं आने पर रेल प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई है, और कार्मिक विभाग ने सभी विभागों से ऐसे कर्मचारियों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट आज गुरूवार तक हर हाल में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ड्यूटी से गायब ऐसे कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके, जिसमें नौकरी से बर्खास्तगी भी हो सकती है। बताया जाता है कि पमरे के जबलपुर रेल मंडल के कार्मिक विभाग के डीपीओ धर्मेंद्र विके के हस्ताक्षर से मंगलवार को एक आवश्यक लेटर सभी ब्रांच अधिकारियों, डीजल व टीआरडी शेड एनकेजे, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि रेल मंडल से 90 दिन या उससे अधिक समय से अनाधिकृत रूप से 83 कर्मचारी- अधिकारी ड्यूटी से गायब हैं।

सूची भी भेजी

साथ ही कार्मिक विभाग ने ड्यूटी से लापता 83 स्टाफ की सूची भी भेजी है। इन लापता स्टाफ की सूची आईपास से निकाली गई है। लेटर में विभाग प्रमुखों से अनुरोध किया गया है कि सूची में अपने विभाग से संबंधित अनुपस्थित अधिकारी,कर्मचारी पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी ईजी कार्मिक अनुभाग को 19 दिसम्बर तक उपलब्ध कराएं, ताकी अद्यतन डीआरएम के समक्ष प्रस्तुत की जा सके।

इस कारण गंभीर है प्रबंधन

दरअसल, लापता कर्मचारियों के संबंध में रेल प्रशासन इसलिए गंभीर है, क्योकि पूर्व में कुछ ऐसे मामले प्रशासन के संज्ञान में आए हैं, जिसमें अपने कार्यस्थल से लंबी अवधि से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित कर्मचारियों के विरुद्ध डिपो प्रभारी,सुपरवाइजर द्वारा उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई एवं अनुपस्थिति के दौरान कर्मचारी की असामयिक मृत्यु हो गई। फलस्वरूप प्रशासन को मृतक कर्मचारी के परिवार को अंतिम निपटारा राशियों का भुगतान, परिवार पेंशन तथा अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता देनी पड़़ी। यदि अनाधिकृत अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारी के विरुद्ध अनुपस्थिति की अवधि के दौरान कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई होती तो संबंधित कर्मचारी को अनावश्यक पात्रता देय नहीं होती। पत्र में चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसे किसी प्रकरण के संज्ञान में आने पर संबंधित कर्मचारी के पर्यवेक्षक को जिम्मेदार माना जाएगा।