आरटीआई: दत्तक संस्थाओं में 776 शिशुओं की मौत, असुरक्षित तरीके से छोड़ा जाना था कारण

आरटीआई: दत्तक संस्थाओं में 776 शिशुओं की मौत, असुरक्षित तरीके से छोड़ा जाना था कारण

नई दिल्ली। असुरक्षित तरीके से शिशुओं को खुले में छोड़ देने, दस्त और श्वसन तंत्र में गंभीर संक्रमण ऐसी मुख्य वजहें हैं जिसके कारण पिछले तीन साल में विशेषीकृत दत्तक संस्थाओं में 776 बच्चों की मौत हो गयी। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) ने यह बताया है । एक न्यूज एजेंसी द्वारा सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में कारा ने बताया है कि राज्य सरकारों और एनजीओ दोनों द्वारा चलाए जाने वाली दत्तक संस्थाओं में 0-6 उम्र समूह में बच्चों की मौत के अन्य कारणों में समय पूर्व जन्म के कारण जटिलताएं और जन्मजात विसंगतियां शामिल हैं। इस साल जुलाई में महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद में एक प्रश्न के जवाब में कहा था कि पिछले तीन साल में गोद देने वाली संस्थाओं में 776 बच्चों की मौत हो गयी । विभिन्न राज्यों में 434 दत्तक ग्रहण संस्थाओं में से 355 का संचालन एनजीओ तथा 79 का संचालन सरकारों द्वारा किया जाता है। 

संस्थाओं में हैं 7074 बच्चे

दत्तक ग्रहण संस्थाओं में 7074 बच्चे हैं, इनमें कुछ अनाथ या बेसहारा हैं और कुछ के परिवार हैं लेकिन उन्हें गोद देने वाली संस्थाओं में रखा गया है। इन संस्थाओं में मौजूद कुल बच्चों में 10 प्रतिशत की मौत हो गई। जवाब के मुताबिक, एक अप्रैल 2016 से इस साल आठ जुलाई तक सबसे ज्यादा उत्तरप्रदेश में 124 बच्चों की मौत हुई। इसके बाद बिहार में 107 और महाराष्ट्र में 81 बच्चों की मौत हो गई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनमें से कुछ मामलों में बच्चों को दत्तक ग्रहण संस्थानों में बेहद नाजुक हालत में लाया गया था और उनके जीवित बचने के आसार बहुत कम थे।