सरदार सरोवर : पुनर्वास के मुद्दे पर डूब प्रभावितों से संवाद

सरदार सरोवर : पुनर्वास के मुद्दे पर डूब प्रभावितों से संवाद

इंदौर। नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमख मेधा पाटकर ने कहा कि गुजरात सरकार अपनी हठधर्मिता के कारण इस बार वह पूरा जलाशय भरना चाहती है। हालांकि, यह मप्र सरकार की यह बात ठीक कि वह हमसे संवाद कर रही है। सरकार खुद कह रही है कि 178 गांव के लोग डूब क्षेत्र में हैं, जबकि केंद्र के सचिव और मंत्रालय कह रहे हैं कि पूर्व सरकार के जीरो बैलेंस वाले शपथ-पत्र हैं। गांव डूब हो रहे हैं, गुजरात और केंद्र सरकार अपना ही शेड्यूल धकेल रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार को भी सशक्त संघर्ष करना चाहिए। अंतर राज्य परियोजना मप्र की सहमति के बिना कैसे आगे बढ़ सकती है। जिस मप्र के 192 गांव, एक नगर डूब रहे हैं, 6400 करोड़ का पूंजी निवेश है। जिस मप्र की अति उपजाऊ जमीन, संस्कृति प्रकृति धरोहर की आहुति दी जा रही है, उस मप्र को अपनी भूमिका ही स्पष्ट नहीं करना चाहिए, बल्कि आंदोलन छेड़ना चाहिए। विस्थापितों को संबोधित करने के दौरान पाटकर ने कहा कि मप्र की मांग को लेकर सीएम को उपवास भी करना चाहिए। डूब क्षेत्र में सात हजार एकड़ टापू बन रहे हैं। हमारी मांग है कि न केवल रोकना चाहिए, बल्कि उतारना चाहिए। सत्यवादी शपथपत्र दें 14 साल में कुछ अधिकारियों ने झूठे शपथ-पत्र दिए थे, अफसोस की बात है कि वे अभी उच्च पदों बने हुए हैं। इस सरकार का फर्ज है कि किस अधिकारी ने जीरो बैलेंस की जानकारी दी थी, वह स्पष्ट करे। आज सरकार को कोर्ट में सत्यवादी शपथ-पत्र देना चाहिए। गुजरात सरकार और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण(एनसीए) मिलकर ऐसा काम कर रहे हैं, जिससे मप्र के लोग परेशान हो रहे हैं। पिछले 15 सालों से प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, उस सरकार ने जो सर्वे, तथ्य सामने रखे, उससे वर्तमान स्थिति काफी अलग है। गुजरात सरकार सरदार सरोवर बांध में पानी भर रही है, उससे प्रदेश की जनता प्रभावित हो रही है। कई जगह टापू बन गए हैं। बघेल ने कहा कि काननू मंत्री और मुख्यमंत्री से मेरी बात हो रही है कि इस मुद्दे को लेकर हम कोर्ट में कैसे जा सकते हैं?

मानवीय दृष्टिकोण अपनाए केंद्र सरकार

बघेल ने कहा कि हमें इस मुद्दे को मानवीय रूप में देखना होगा। स्थिति जो बन रही है... गुजरात पानी नहीं छोड़ रहा है। मप्र को बिजली मिलना चाहिए 57 प्रतिशत वो दो वर्षाें से बिजली भी नहीं दी गई है। पिछली सरकार ने अपनी बात एनसीए में रखी नहीं, गुजरात को ज्यादा पानी देते रहे। गुजरात की सरकार और एनसीए मप्र की बातों को ध्यान नहीं दे रही हैं। हमारे एसीएस दिल्ली में मिलकर आए हैं। केंद्र सरकार और गुजरात सरकार को मानवीय दृष्टिकोण से मप्र की जनता के प्रति अपना दृष्टिकोण रखना चाहिए। एनसीए की बैठक में हमने पानी भरने का विरोध किया। गुजरात के लोग राजी नहीं हुए।

पीएम मोदी और पूर्व सीएम शिवराज पर साधा निशाना... चुप क्यों हैं चौहान

15 साल में मुख्यमंत्री रहते शिवराज सिंह एक बार भी हमारे साथ बात करने नहीं बैठे। आज भी चौहान को आगे आना चाहिए, वे चुप क्यों हैं? नेतृत्व छोड़ दिया कि मप्र छोड़कर कहीं विदेश चले गए? नर्मदा सेवा यात्रा करने वालों को नर्मदा घाटी के लोगों के बारे में बोलने की इच्छा नहीं होती हम यह सोच नहीं सकते। मेधा ने कहा कि पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह स्थिति से वाकिफ हैं, उन्हें भी यहां आना चाहिए। गुजरात सरकार के सामने उनके विस्थापित भी लड़ रहे हैं। 72 गांव को पर्यटन के नाम पर मोदीजी लेना चाहते हैं। वहां जंग चल रही है। हाईकोर्ट ने वहां पर्यटन के लिए हरियाणा भवन, उप्र भवन आदि के निर्माण पर रोक लगा दी है।