स्मार्ट सिटी : 2400 क्वाटर्स तोड़ने की मंजूरी

स्मार्ट सिटी : 2400 क्वाटर्स तोड़ने की मंजूरी

भोपाल। स्मार्ट सिटी की राह में रोड़ा बने साउथ और नॉर्थ टीटी नगर में बने पीडब्ल्यूडी के 2400 क्वाटर्स जल्द ही जमींदोज किए जाएंगे। क्योंकि अब इन्हें तोड़ने के लिए तीन महकमों की जगह सिर्फ पीडब्ल्यूडी की मंजूरी लेनी होगी। क्वाटर्स तोड़ने के लिए जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे। यह फैसला मंगलवार को मुख्य सचिव (सीएस) एसआर मोहंती की अध्यक्षता वाली राज्य हाई पावर कमेटी की बैठक में लिया गया। बैठक में स्मार्ट सिटी साइट स्थित मकानों में रहने वालों की शिफ्टिंग पर चर्चा हुई। इस दौरान गृह विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा-इतने लोगों को एक साथ शिफ्ट नहीं किया जा सकता। ऐसे में अधिकारियों ने हाउस रेंट एलाउंस का सुझाव दिया। लेकिन बैठक में तय किया गया कि बीडीए के लक्ष्मीगंज गल्ला मंडी में तैयार हो चुके मकानों में शिफ्टिंग पर सहमिति बनीं, क्योंकि यहां 551 में से 360 मकान तैयार हो चुके हैं। जल्द ही यह स्मार्ट सिटी को सौंप दिया जाएगा। इसके अलावा स्मार्ट सिटी में बन रही बहुमंजिला सरकारी इमारतों के मेंटेनेंस पर भी चर्चा की गई।

स्टेडियम के पास दो मीटर हिस्से में की जाएगी खुदाई

टीटी नगर स्टेडियम के पास स्मार्ट हाट का निर्माण चल रहा है। इसके लिए स्टेडियम की तरफ दो मीटर जमीन की जरूरत स्मार्ट सिटी को है। इस पर खेल विभाग को आपत्ति है। क्योंकि यहां खिलाड़ियों को आने जाने में दिक्कत हो रही थी। बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि फिलहाल बंद किया गया जैन मंदिर की तरफ का गेट खोला जाएगा। यहां से खिलाड़ी आवाजाही कर सकेंगे। स्मार्ट सिटी दो मीटर हिस्से में खुदाई कर सकेगा। काम पूरा होने के बाद इसे पुराने स्वरूप में लाकर खेल विभाग को एक मई तक सौंप देगा।

वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का पैसा स्वच्छता में होगा इस्तेमाल

आदमपुर छावनी में कचरे से बिजली बनाने का प्रोजेक्ट जमीन पर उतरने की संभावना खत्म हो चुकी है। दरअसल बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र से मिला पैसा काफी समय से अटका है। इस पर सीएस ने पैसे का इस्तेमाल स्वच्छ भारत मिशन के अन्य कामों में करने की मंजूरी दी।

बिजली की दरों पर उलझा प्रोजेक्ट

नगर निगम, राज्य सरकार और एस्सेल इंफ्रा के बीच बिजली की दरों को लेकर सहमति नहीं बन पाई। कंपनी को कचरे से बिजली की दर 6.39 रुपए प्रति यूनिट बताई गई थी। बाद में बिजली कंपनी इस दर पर खरीदी के लिए तैयार नहीं हुई। नतीजा, तीनों के बीच पावर परचेस एग्रीमेंट नहीं हो पाया। ऐसे में एस्सेल इंफ्रा ने यहां निवेश नहीं किया।