डस्टबिन फ्री सिटी में लगा दिए साढ़े 13 करोड़ के स्मार्ट डस्टबिन, अब हटा रहे

डस्टबिन फ्री सिटी में लगा दिए साढ़े 13 करोड़ के स्मार्ट डस्टबिन, अब हटा रहे

भोपाल। राजधानी में 6000 करोड़ रुपए लागत वाले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को आकार देने वाले भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएससीडीसीएल) अधिकारी कितने स्मार्ट हैं, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि करोड़ों खर्च कर स्मार्ट डस्टबिन लगाने के बाद उन्हें पता चला है कि शहर डस्टबिन फ्री है। अब सवाल है कि अधिकारियों की इस लापरवाही से डस्टबिन पर खर्च हुए करोड़ों रुपए की भरपाई कौन करेगा? हालांकि अधिकारियों ने गलती छिपाने का नया तरीका निकाल लिया है। वे अब शहर में लगे स्मार्ट बिन्स को आॅन डिमांड सरकारी दफ्तरों, स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के साथ ही पर्यटन स्थलों में शिफ्ट करेंगे। बता दें कि पांच साल पहले शुरू हुए स्वच्छता सर्वे पैरामीटर्स में कहा गया है कि घरों से कचरे को ट्रेचिंग ग्राउंड (कचरा खंती) तक पहुंचाया जाना है। यानी डस्टबिन का काम खत्म कर शहरों को डस्टबिन फ्री बनाया जाना है। इंदौर ने ये काम तीन साल पहले कर लिया, जबकि भोपाल एक साल पहले डस्टबिन फ्री सिटी बन गया। नगर निगम ने शहर में रखे 4000 से ज्यादा डस्टबिन हटा लिए। इधर, स्मार्ट सिटी कंपनी बेसुध थे और उन्होंने इसी दौरान 16 करोड़ के स्मार्ट बिन प्रोजेक्ट को शुरू कर दिया। 150 स्मार्ट बिन लगाए जाने थे, जिनमें से आनन-फानन में 130 इंस्टॉल कर दिए गए। अब जब करोड़ों रुपए बर्बाद हो गए तब स्मार्ट सिटी कंपनी की नींद टूटी और उन्हें मालूम हुआ कि भोपाल डस्टबिन फ्री सिटी है। अहम बात ये है कि भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉपोर्रेशन 13 करोड़ 50 लाख में स्मार्ट बिन लगाने और 6 साल तक संभालने का जिम्मा निजी कंपनी को सौंप चुकी है। कंपनी शहर में 98 लोकेशन पर 130 बिन लगा चुकी है। इन्हीं स्मार्ट बिन्स को रिलोकेट किया जाना है। यह पहली बार नहीं है कि शहर में साफसफाई को लेकर फिजूलखर्ची की गई हो। शहरभर में रखे गए परंपरागत कचरा कंटेनर में 50 लाख रुपए खर्च कर जीपीएस लगाए गए थे। ताकि इनके भरते ही निगम के कंट्रोल रूम में सूचना पहुंच सके। फिर स्वच्छ सर्वे 2018 में डस्टबिन फ्री सिटी के नाम पर ये कंटेनर कबाड़ में फेंक दिए गए।

डस्टबिन फ्री शहर में स्मार्ट बिन का क्या काम्र

मई में नगरीय प्रशासन विकास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने नगरीय निकायों की बैठक के दौरान भोपाल स्मार्ट सिटी कंपनी के अंडरग्राउंड स्मार्ट गारबेज बिन प्रोजेक्ट को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि जब डोर टू डोर कलेक्शन किया जा रहा है तो स्मार्ट बिन की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा था कि जब शहर को डस्टबिन फ्री कर दिया गया है, तो फिर यह स्मार्ट डस्टबिन क्यों लगाईं गईं।

सेंसर और ढक्कन खराब

गौरतलब है कि स्मार्ट बिन का सेंसर और ढक्कन खराब बहुत जल्ती खराब हो रहा है, जिससे ये डर्टी स्पॉट्स बन गए हैं। यह बात नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को रास नहीं आई। ऐसे में उन्होंने इस प्रोजेक्ट को रद्द कर पुराने डस्टबिन को रिलोकेट करने को कहा है।