सुझावों पर बढ़ना थी स्मार्ट लाइब्रेरी, तीन साल बाद भी अता-पता नहीं

सुझावों पर बढ़ना थी स्मार्ट लाइब्रेरी, तीन साल बाद भी अता-पता नहीं

जबलपुर । स्मार्ट सिटी के तहत शहर से जुड़ी जानकारियों और साहित्य से अपडेट करने के लिए स्मार्ट ई लाइबे्ररी लोगों की सलाह पर बढ़ना थीं। स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने 3 साल पहले 200 स्मार्ट लाइब्रेरी स्मार्ट सिटी एरिया में लगाए जाने की तैयारी की थी। 3 साल बाद मामला वहीं का वहीं है और इस प्रोजेक्ट को स्मार्ट सिटी भूल चुकी है। इनके फीचर व फं क्शन के लिए डेमो हेतु आई 2 स्मार्ट लाइब्रेरी मशीनों ने लोगों की राय भी ली थी। राय ये ली गई थी कि और कौन से फीचर होने चाहिए या किस प्रकार की जानकारी इसमें और होना चाहिए। ये मशीनें मानस भवन स्थित स्मार्ट सिटी के प्रवेश द्वार पर लगाई गई थीं। 200 मशीनें ठेके पर लगाई जानी थीं। इसके पहले फीचर की जांच के लिए प्रूफ आफ कॉन्सेप्ट के तहत 2मशीनें बुलाई गई थीं ताकि आने-जाने वाले लोग इन मशीनों का उपयोग कर अपने सुझाव दे सकें कि उनमें और क्या फीचर जुड़ने चाहिए। इन सुझावों को आने वाली मशीनों में इस्तेमाल किया जाना था। इन दोनों मशीनों में लोगों ने बढ़चढ़कर अपने सुझाव भी दिए थे।

ये होता मशीनों में

देश-दुनिया के ई पेपर देखें जा सकेंगे। मैगजीन के ई-वर्जन देखने मिलेंगे। टाउनहाल लाइब्रेरी की वे भी पुस्तकें जिन्हें पब्लिश करने के राइट हैं। शहर और आसपास के टूरिज्म फाइल देखी जा सकेगी। इसके अलावा जहां लगेंगी उस क्षेत्र की स्पेसिफिक इन्फारमेशन जैसे रेलवे स्टेशन में लगनी है तो वहां क जानकारी,विश्वविद्यालय में लगनी है तो उसके कोर्स के हिसाब से पुस्तकें आदि की जानकारी मिलेगी।

प्रिन्ट भी मिलना था

यदि किसी को इन मशीनों से पढ़ने के बाद कुछ प्रिन्ट निकालने की जरूरत हुई तो उसके लिए प्रिन्टर भी अटैच किया जाना था ,लेकिन प्रिन्ट लेने के लिए राशि तय रहेगी जिसका भुगतान जे-कार्ड या आन लाइन कार्ड से किया जा सकेगा।

घंटे के हिसाब से शुल्क

इन मशीनों के उपयोग के लिए शुल्क तय किया जाना था। यह शुल्क 5 रुपए घंटे भी हो सकता है। इसका भुगतान भी जे-कार्ड या आन लाइन कार्ड से किए जाने की व्यवस्था की गई थी।

स्मार्ट ई-लाइब्रेरी के संबंध में आगे कार्रवाई नहीं हो पाई थी,अब इस बारे में संबंधितों से चर्चा कर पता करवाता हूं। -आशीष कुमार,आयुक्त नगर निगम।