संगीत के रस में गूंजे बसंत के रंग, हास्य नाटक के जरिए किया समाज की व्यवस्था पर कटाक्ष

संगीत के रस में गूंजे बसंत के रंग, हास्य नाटक के जरिए किया समाज की व्यवस्था पर कटाक्ष

भोपाल ।  रवींद्र भवन सभागार में अभिनव कला परिषद के वार्षिक कला समागम के दूसरे दिन शनिवार को डॉ. रामवल्लभ आचार्य के बसंत ऋतु पर लिखे गीतों को चार कलाकारों ने मंच पर प्रस्तुत किया। संगीत संयोजन संगीतकार कल्याण सेन ने किया। वहीं कार्यक्रम के दूसरे चरण में राजीव वर्मा द्वारा निर्देशित नाटक भाग अवंति भाग का मंचन भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दिलीप महाशब्दे ने मन में उमंग तन में तरंग जागी आई बसंत बहार गीत से की। इसके बाद मन आज वासंती है आज हर ह्दय आज वासंती है...गीत की प्रस्तुति कल्पना झोककरकर और कीर्ति सूद ने दी। अपनी तालीम, साधना और अभ्यास का परिचय देते हुए कीर्ति सूद ने आ गया मौसम सुहाना, प्यार करने का बहाना आ गया गीत सुनाकर श्रोताओं को सात सुरों के रस से सराबोर कर दिया। उनका बखूबी साथ निभाया हारमोनियम पर कल्याण सेन, की-बोर्ड पर आरिफ, तबले पर नईम अल्लावाले, आॅक्टोपैड पर अनिल ओझा ने। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अपने सुरों से सजाया प्रकाश पारनेकर और कीर्ति सूद ने युगल गीत में। कार्यक्रम में दिलीप महाशब्दे और राजीव वर्मा को अभिनव कला सम्मान से विभूषित भी किया गया। वहीं देश के जाने-माने उद्घोषक और कला समीक्षक विनय उपाध्याय को अरविंद चतुर्वेदी स्मृति साहित्य सेवी सम्मान से भी नवाजा गया।