नई महापौर परिषद के गठन  तक कमिश्नर संभालेंगे निगम की  कमान,  बनेंगे  प्रशासक

नई महापौर परिषद के गठन  तक कमिश्नर संभालेंगे निगम की  कमान,  बनेंगे  प्रशासक

तीन बार स्वच्छता के खिताब की साक्षी बनी महापौर मालिनी गौड़ के कार्यकाल का काउंट डाउन शुरू हो गया है। मात्र 30 दिन का कार्यकाल बचा है। अगले माह 19 फरवरी को महापौर समेत पूरी परिषद भंग हो जाएगी। इसी दिन शासन के आदेश पर दूसरे शहरों की तरह इंदौर नगर निगम के प्रशासक की जिम्मेदारी कमिश्नर आकाश त्रिपाठी को सौंप दी जाएगी। नई परिषद का गठन होने तक निगम की कमान उन्हीं के हाथों में ही रहेगी। कमिश्नर त्रिपाठी कब तक प्रशासक बने रहेंगे, यह तय नहीं है, क्योंकि अभी तक निगम चुनाव को लेकर कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है।    
पार्षदों का हस्तक्षेप भी बंद होगा-19 फरवरी के बाद कमिश्नर के हाथ में कमान आने के बाद अफसरों की स्थिति नगर निगम में मजबूत होने वाली है। ऐसा होने के बाद वार्डों में पार्षदों का हस्तक्षेप भी बंद हो जाएगा। प्रदेश की 10 से अधिक नगरीय निकायों का कार्यकाल जनवरी-फरवरी 2020 में समाप्त हो रहा है। नियमानुसार यहां इससे पहले चुनाव हो जाना था, लेकिन परिसीमन और मतदाता सूची तैयार नहीं होने के कारण चुनाव का टलना तय है। 
कमिश्नर, कलेक्टर और एसडीएम  को जिम्मेदारी 

इंदौर सहित अन्य बड़े नगर निगमों में संभाग आयुक्त को प्रशासक बनाया जा सकेगा। वहीं जिला मुख्यालय की नगर निगम में कलेक्टर को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। नगर पालिका में एसडीएम और नगर पंचायत में तहसीलदार को प्रशासन नियुक्त किया जा सकता है।  प्रशासक नियुक्त करने से पहले सरकार नगर निगमों की परिषद भंग करने की अधिसूचना उसके कार्यकाल समाप्त होने के एक हफ्ते पहले जारी करेगी।