कैफे कॉफी डे के संस्थापक सिद्धार्थ लापता, पत्र में लिखा- हार गया हूं...

कैफे कॉफी डे के संस्थापक सिद्धार्थ लापता, पत्र में लिखा- हार गया हूं...

मंगलुरु। देश की जानी-मानी कॉफी चेन कैफे कॉफी डे के संस्थापक एवं पूर्व विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ सोमवार से लापता हैं। 58 वर्षीय सिद्धार्थ सोमवार सुबह 11 बजे बेंगलुरु से हासन जिले के सक्लेशपुर जाने की जानकारी देकर निकले थे। लेकिन उन्होंने मेंगलुरु की ओर बढ़ना जारी रखा। शाम लगभग 7 बजे उन्होंने नेत्रवती पुल पर अपने चालक बसवराज पाटिल को कार रोकने को कहा और कार से उतरकर फोन पर बात करते हुए टहलने लगे। वह लगभग एक घंटा तक वापस नहीं लौटे, जिसके बाद चालक ने उनके मोबाइल पर फोन किया। उनका फोन बंद मिला तो चालक ने तुरंत उनके परिवार को सूचना दी और स्थानीय लोगों की मदद से उनकी तलाश शुरू कर दी। आर्मी, एयरफोर्स और एनडीआरएफ उनकी तलाश में जुटी है। उन्होंने 27 जुलाई को कंपनी के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स और कर्मचारियों के नाम एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कंपनी को हो रहे नुकसान और भारी कर्ज की बात की है।

सिद्धार्थ ने 26 साल में रेवेन्यू 300 गुना बढ़ाया, कंपनी पर 6550 करोड़ कर्ज

सिद्धार्थ का जन्म कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में हुआ था। उनका परिवार 140 साल से कॉफी प्लांटेशन से जुड़ा है। 1993 में सिद्धार्थ ने कॉफी-डे ग्लोबल (अमलगेमेटेड बीन कॉफी ट्रेडिंग कंपनी) की शुरुआत की थी। उस वक्त कंपनी का रेवेन्यू सिर्फ 6 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2017-18 में कैफे कॉफी-डे ग्लोबल का रेवेन्यू 1,777 करोड़ रुपए और 2018- 19 में 1,814 करोड़ रुपए पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष खत्म होने पर कंपनी को 2,250 करोड़ रुपए के रेवेन्यू की उम्मीद है। लेकिन, दूसरा पहलू यह भी है कि पिछले कुछ सालों से सिद्धार्थ कॉफी बिजनेस समेत अन्य कारोबारों में नकदी संकट से जूझ रहे थे। 2 साल पहले उनके ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे भी पड़े थे।

1996 में पहला कैफे खोला था, अब 1752 कैफे

इस साल मार्च तक देश के 200 शहरों में कैफे कॉफी डे (सीसीडी) के 1,752 कैफे थे। पहला कैफे 1996 में बेंगलुरु में ब्रिगेड रोड पर खोला था। भारत के बाहर पहला कैफे 2005 में आस्ट्रिया की राजधानी विएना में खोला था। आस्ट्रिया, चेक रिपब्लिक और मलेशिया में भी कंपनी का बिजनेस है। सिद्धार्थ की कंपनी हर साल 28 हजार टन कॉफी एक्सपोर्ट करती है। 2 हजार टन देश में बेचती है। देशभर में कंपनी में करीब 30 हजार कर्मचारी हैं। सिद्धार्थ ने सीसीडी के अलावा हॉस्पिटेलिटी चेन भी शुरू की थी, जिसके तहत 7- स्टार रिसॉर्ट का संचालन किया जाता है।

आईटी की सफाई, कानून के तहत की गई कार्रवाई

कैफे कॉफी डे के लापता मालिक वीजी सिद्धार्थ के एक पत्र में लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों का इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जवाब दिया है। विभाग के सूत्रों ने कहा कि कैफे कॉफी डे के खिलाफ जांच के मामले में कानून के मुताबिक ही काम किया गया। सिद्धार्थ का आरोप था कि दो बार उनके शेयर अटैच करने के कारण वह आर्थिक रूप से टूट गए थे।

पढ़िये 27 जुलाई को लिखा गया उनका पत्र...

37 साल बाद मैं अपनी तमाम कोशिशों के बाद भी एक सही और फायदे वाला बिजनेस मॉडल नहीं तैयार कर सका हूं। जिन लोगों ने मुझ पर विश्वास किया उन्हें निराश करने के लिए मैं माफी चाहता हूं। मैं लंबे समय से लड़ रहा था, लेकिन आज मैं हार मानता हूं क्योंकि मैं एक प्राइवेट इक्विटी लेंडर पार्टनर का दबाव नहीं झेल पा रहा हूं, जो मुझे शेयर वापस खरीदने के लिए फोर्स कर रहा है। इसका आधा ट्रांजेक्शन मैं 6 महीने पहले एक दोस्त से बड़ी रकम उधार लेने के बाद पूरा कर चुका हूं। दूसरे लेंडर भी दबाव बना रहे थे जिस कारण मैं हालात के सामने झुक गया हूं। आयकर विभाग के एक पूर्व डीजी ने मेरे शेयर्स को दो बार अटैच किया, जिससे माइंडट्री के साथ मेरी डील ब्लॉक हो गई और फिर कॉफी डे के शेयर्स की जगह ले ली, जबकि संशोधित रिटर्न्स मेरी ओर से फाइल किए जा चुके थे। इसके कारण पैसे की कमी हो गई थी। हर फाइनेंशल ट्रांजेक्शन मेरी जिम्मेदारी है। मेरी टीम, आडिटर्स और सीनियर मैनेजमेंट को मेरे सारे ट्रांजेक्शंस के बारे में कुछ नहीं पता। कानून को मुझे और सिर्फ मुझे जिम्मेदार बताना चाहिए, क्योंकि मैंने यह जानकारी सबसे छिपाई, अपने परिवार से भी। मेरा मकसद किसी को धोखा देने या गुमराह करने का नहीं था। मैं एक असफल आन्त्रप्रन्योर रहा हूं और आशा की है कि मुझे समझा और माफ किया जाएगा।

वीजी सिद्धार्थ