इरादों में दृढ़ता और मन में शुभताव शुचिता के भाव जरूरी : सुधांशुजी

इरादों में दृढ़ता और मन में शुभताव शुचिता के भाव जरूरी : सुधांशुजी

इंदौर। दीपक की लौ हमेशा ऊपर की ओर बढ़ती है। बुद्धि और चित्त की शुद्धि के बिना मनुष्य भी समाज में आगे नहीं बढ़ सकता। जीवन जप, तप और साधना से परिपूर्ण होना चाहिए। देखने में तो सभी इंसान एक जैसे होते हैं, लेकिन कुछ बुझे हुए और कुछ दीपक की तरह जलते हुए होते हैं। दीपक की बाती को जलाने का तरीका तो एक समान ही होता है, लेकिन उसी दीपक की सार्थकता होती है, जो स्वयं जल कर दूसरों को रोशन करता है। थोड़े दिनों की जिंदगी में आने वाले अंधेरे को डंडे से मारकर नहीं भगाया जा सकता, उसके लिए तो रोशनी ही चाहिए। हम शुभ की ओर चलें, अशुभ की अनदेखी करें। पाप के विचार और पाप के संस्कार नष्ट करना जरूरी है। विश्व जागृति मिशन दिल्ली के संस्थापक आचार्य सुधांशुजी महाराज ने दशहरा मैदान पर 10 अप्रैल से चल रहे पांच दिवसीय विराट भक्ति सत्संग में उपस्थित भक्तों के सैलाब को संबोधित करते हुए उक्त दिव्य बातें कही। दोनों सत्रों में दशहरा मैदान का विशाल पांडाल खचाखच भरा रहा। दोपहर में मंत्र दीक्षा के कार्यक्रम में लगभग दो हजार लोगों ने आचार्यश्री से गुरु दीक्षा प्राप्त की। हास्य योग का प्रशिक्षण भी दिया गया। संध्या को प्रवचन के बाद आचार्यश्री को विश्व जागृति मिशन की इंदौर शाखा की ओर से आत्मीय विदाई दी गई। मिशन के कार्यकर्ताओं ने उन्हें मालवा की पगड़ी, शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। समापन बेला में जब आचार्यश्री मंच के सामने बने दर्शनपथ से होकर गुजरे तो दोनों ओर जमा हजारों भक्त उनके दर्शन एवं स्पर्श के लिए बेताब हो उठे। आचार्य सुधांशुजी ने कहा कि मन की एकाग्रता आसान नहीं है। हालांकि असंभव भी नहीं है। जितने महान लोग हुए हैं, वे मन को एकाग्र करने के बाद ही शिखर पर पहुंचे हैं। जब तक हमारा जीवन साधनामय नहीं होगा, सफलता नहीं मिलेगी। बह्म मुहूर्त और सांध्य बेला में की गई साधना अधिक कारगर होती है। ध्यान रखें कि सुबह के समय हमारी ऊर्जा बिखरी हुई न रह जाए। हमारी ऊर्जा परिणाममूलक होना चाहिए। हम स्वयं अपने बारे में सही आकलन एकांत में ही कर सकते हैं। शुद्धिकरण का समय एकांत का ही होना चाहिए। गलत प्रवृत्ति के लोग जब हमारे दृढ़ निश्चय को देखेंगे तो खुद ही हमसे अलग हो जाएंगे। मन में शुभता का भाव तभी आएगा, जब हम अशुभ की अनदेखी करना शुरू कर देंगे। अशांत मन में ही बुरे विचार जगह पाते हैं। अशांत होकर कहीं से कुछ भी नहीं मिल सकता। अशांति हमारी ऊर्जा का विस्फोट है।