राजनीतिक संरक्षण से बेलगाम हुए रेत भरे वाहनों से बर्बाद हो रहे गांव और खेत

राजनीतिक संरक्षण से बेलगाम हुए रेत भरे वाहनों से बर्बाद हो रहे गांव और खेत

ग्वालियर ।  भितरवार क्षेत्र में राजनीतिक संरक्षण में फलफूल रहे रेत के अवैध उत्खनन का खामियाजा क्षेत्रीय नागरिकों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है। दहशतजदा लोग खुलकर तो कुछ नहीं बोल पा रहे, लेकिन इशारों में इसके लिए मंत्री लाखनसिंह यादव को जिम्मेदार ठहराते हैं। रेत से भरे वाहनों के कारण खेत और गांवों के रास्ते पूरी तरह बर्बादी की कगार पर पहुंच चुके हैं। अवैध रेत उत्खनन ने क्षेत्र के लोगों का सुकून से जीना मुश्किल कर दिया है। भितरवार क्षेत्र के ग्राम लिधौरा के वाशिंदों के अनुसार रेत माफियाओं द्वारा लुहारी घाट सहित अन्य स्थानों से निकाली जा रही रेत से भरे वाहनों से खेतों में खड़ी फसलें खराब हो रही हैं, जब भी ऐसे वाहन चालकों को खेतों से निकलने से रोकने की कोशिश की जाती है तो वह दबंगी दिखाकर मुंह बंद करा देते हैं। रेत माफिया द्वारा रेत का परिवहन किए जाने के कारण गांवों में लगी पाइप लाइन भी टूट गई है। गांवों के रास्ते पूरी तरह खराब हो चुके हैं। वहां पैदल चलना भी मुश्किल हो चुका है। गांव से गुजरने वाले वाहनों को रोकने के प्रयास में ग्रामीणों का रेत माफियाओं से विवाद भी होता रहता है।

मुख्यमंत्री का फरमान भी दरकिनार

कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सभी कलेक्टर्स को फरमान जारी किया था कि जिस जिले में रेत के अवैध घाटों से खनन और परिवहन होते मिला तो उस जिले के मुखिया के खिलाफ सीधी कार्रवाई होगी, लेकिन ग्वालियर जिले में इस फरमान को कोई अहमियत नहीं दी जा रही है। इसका प्रमाण भितरवार क्षेत्र में देखने को मिल रहा है।

दुर्घटनाओं से भयभीत ग्रामीण

चूंकि सिंध नदी के लुहारी घाट आदि स्थानों से अवैध रेत खनन करने वाले सीधे रास्तों का उपयोग नहीं करते। सुरक्षा की दृष्टि से वे जिन रास्तों का उपयोग करते हैं, उनमें अधिकांश गांवों के बीच से होकर गुजरते हैं। वाहन चालक रेज रफ़्तार से चलते हैं, इसलिए हमेशा दुर्घटना का भय बना रहता है।