सट्टा लगाते-लगाते घाटा हुआ तो खुद बुकी बन गया

सट्टा लगाते-लगाते घाटा हुआ तो खुद बुकी बन गया

इंदौर  । आईपीएल क्रिकेट के खिलाफ इंदौर पुलिस का अभियान जारी है। क्राइम ब्रांच ने मांगलिया से दो सटोरियों और उनके ग्राहक सहित तीन को पकड़ा है। सटोरियों से 12 मोबाइल, एक लैपटॉप, एक कैल्कुलेटर, एक एलसीडी टीवी, दो रजिस्टर सहित 15 हजार नकदी बरामद किए हैं। लैपटॉप में सट्टा कारोबार से जुड़े लोगों के नाम मिले हैं। साथ ही लाखों का हिसाब-किताब भी मिला है। एएसपी क्राइम अमरेंद्रसिंह के अनुसार मांगलिया पुलिस चौकी क्षेत्र की चौधरी कॉलोनी में एक नर्स के घर में आईपीएल क्रिकेट का सट्टा संचालित होने की खबर मिली थी। शुक्रवार रात उक्त मकान की तीसरी मंजिल पर दबिश देते हुए आॅनलाइन सट्टा लेते टोनी उर्फ अजय पिता हरिकिशन बावेजा (35) निवासी एमआईजी कॉलोनी, नीलेश पिता गोवर्धन शिवहरे (28) निवासी चौधरी कॉलोनी (मांगलिया) को पकड़ा। आरोपी दिल्ली कैपिटल और कोलकाता नाइट राइडर के मध्य खेले जा रहे मैच का सट्टा ले रहे थे। कार्रवाई के दौरान दोनों से सट्टे में जीते हुए पैसे लेने आया ग्राहक देवेश पिता बलराम यादव (27) निवासी नंदानगर भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पान की दुकान चलाने वाले देवेश ने बताया वह सालभर से अजय उर्फ टोनी के पास क्रिकेट का सट्टा लगा रहा है।

कोडवर्ड में लिखे नाम और हिसाब किताब

पूछताछ में स्नातक तक पढ़े अजय ने बताया वह एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। नौकरी छोड़ने के बाद चार सालों से आईपीएल सट्टा कर रहा है। वह पहले खुद सट्टा लगाता था लेकिन घाटा होने पर खुद बुकी बन गया। एमबीए पास निलेश मांगलिया क्षेत्र में ही किराने की दुकान चलाता है। पहले निलेश किसी अन्य बुकी के लिए सट्टा लेता था। तब उसकी अजय से पहचान हुई थी। इसके बाद दोनों पार्टनरशिप में खुद बुकी बन गए। उन्होंने चौधरी कॉलोनी में कुछ दिन पहले ही किराए पर कमरा लिया था। एएसपी सिंह के अनुसार दोनों के तार इंदौर के अन्य लोगों सहित मुंबई के सटोरियों से भी जुड़े है। जब्त डायरियों में सट्टा लगाने वाले लोगों के नाम व उनके लेनदेन की जानकारी और हिसाब-किताब कोड वर्ड में लिखा है। आरोपी 12 मोबाइल से सट्टा लेने के बाद मैच के अगले दिन हार-जीत का हिसाब करते थे। दोनों ने बताया कि कोई ग्राहक बड़ा सट्टा लगाता था तो ये उसे अपने से बड़े बुकी के पास प्रति ग्राहक कमीशन पर उतार देते थे। जिन सिम कार्ड के जरिए आरोपी सट्टा खा रहे थे उनमें से कुछ उन्होंने फर्जी दस्तावेजों पर ली थी।