ब्लैकलिस्टेड कंपनी को 4.5 करोड़ का ठेका क्यों दिया?

ब्लैकलिस्टेड कंपनी को 4.5 करोड़ का ठेका क्यों दिया?

ग्वालियर। जीवाजी विवि में कार्यपरिषद की विशेष बैठक सोमवार को हुई। बैठक में कार्यपरिषद सदस्यों ने कहा कि जिस कंपनी माइक्रो-प्रो नागपुर को जबलपुर विवि ने ब्लैकलिस्टेड कर दिया था, उसे जेयू में विश्वविद्यालय यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम (यूएमएस) का साढेÞे चार करोड़ का ठेका क्यों दिया गया? कंपनी समय पर रिजल्ट नहीं दे पा रही हैं और जो रिजल्ट आ रहे हैं, उनमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी है। निर्णय लिया गया कि नई कंपनी के लिए टेंडर जारी किया जाएगा और नई कंपनी के आकर काम शुरू करने तक माइक्रो-प्रो कंपनी से रिजल्ट लिए जाएंगे। ईसी मेंबर मनेंद्र सोलंकी, अनूप अग्रवाल ने माइक्रो-प्रो कंपनी को मामला उठाते हुए पूछा कि टेंडर किसने बनाया और कौन लोग कंपनी का काम देखने गए थे और उन्होंने क्या रिपोर्ट दी? कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि पुरानी बातों पर चर्चा करने से कोई फायदा नहीं है, नई कंपनी के लिए टेंडर निकाले जा रहे हैं। ईसी मेंबर मनेंद्र सिंह ने कहा कि ये बात साफ होना चाहिए कि आखिर किस कमेटी ने कंपनी को लेकर ओके रिपोर्ट दी थी। इसके बाद कंपनी को लेकर दी गई रिपोर्ट मंगवाई गई। रिपोर्ट में कमेटी सदस्यों प्रो. अविनाश तिवारी, प्रो. डीसी गुप्ता और पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. राकेश कुशवाह के नाम थे मगर रिपोर्ट नहीं थी। फाइल लेकर आने वाले कम्प्यूटर का काम देख संजय बरथरिया से पूछा गया कि रिपोर्ट कहां हैं तो उन्होंने जानकारी होने से इंकार कर दिया। मेंबरों ने कहा कि रिपोर्ट अगली मीटिंग में रखी जाए। इसके बाद मनेंद्र सिंह ने पूछा कि कंपनी को अभी तक कितना भुगतान किया गया है। कुलसचिव आईके मंसूरी ने कहा कि 35 लाख रुपए का भुगतान कंपनी को किया गया। मेंबर के मांगने पर भुगतान की फाइल आई तो उसमें 41.30 लाख भुगतान किया गया था। मेंबर से पूछा भुगतान से 35 लाख से ज्यादा हुआ है और एडवांस किया गया है। कुलपति और कुलसचिव ने कहा कि टेंडर की शर्त थी, इसलिए एडवांस भुगतान किया गया है। बैठक में समन्वय समिति भोपाल द्वारा परीक्षा संबंधी कार्य के नए पारिश्रमिक दर मान्य की गई।

विवि के प्रोफेसरों से नहीं अधिकृत एजेंसी से टेंडर बनवाया जाए

ईसी मेंबर मनेंद्र सिंह ने कहा कि परीक्षा के काम के लिए नई कंपनी को लाने के लिए नया टेंडर निकाला जाएगा, लेकिन टेंडर विवि के प्रोफेसरों से नहीं बल्कि अधिकृत एजेंसी से टेंडर बनवाया जाए ताकि कहीं चूक नहीं हो। मेरे द्वारा ईसी की विशेष बैठक जबलपुर विवि द्वारा ब्लैकलिस्टेड कंपनी को यूएमएस का साढ़े 4.5 करोड़ का ठेका क्यों दिया गया और जिस कमेटी ने कंपनी को लेकर रिपोर्ट दी थी, वह रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन ठेका क्यों दिया, इस पर कोई ठोस जवाब नहीं मिला साथ ही कंपनी के काम को लेकर कमेटी की रिपोर्ट भी सामने नहीं आई। रिपोर्ट अगली मीटिंग में रखने को कहा गया है।