दिव्यांग पति को गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट पहुंची महिला

दिव्यांग पति को गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट पहुंची महिला

जबलपुर।    शासन द्वारा दिव्यांगों के लिए चलाए जाने वाली शासकीय योजना उन तक पहुंचाने के शासन प्रशसन भले ही तमाम प्रयास कर रही है लेकिन अब भी बड़ी संख्या में दूर दराज गांव में रहने वाले दिव्यांग शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित है। वहीं बाबूराज में उनके मामले ऐसे उलझे रहते है कि दिव्यांगों को दμतरों के चक्कर लगाने पड़ते है। ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिला में सामने आया। एक महिला जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर ग्राम से अपने दिव्यांग पति को लेकर डिंडौर पहुंची। वह बस स्टेंड से अपने पति को गोद में लेकर चिलचिलाती धूप में कलेक्ट्रेट पहुंची। इस दृश्य को लेकर लोग द्रवित हुए बिना नहीं रहे। कुछ सामाजिक संस्थाओं ने यथा संभव दंपत्ति को आर्थिक सहायता भी प्रदान की। 75 प्रतिशत दिव्यांग माया सोनवानी ने बताया कि उसका पति विजयदास सोनवानी 75 प्रतिशत विकलांग है। उसको पूर्व में पेंशन मिला करती थी। किन्तु ग्राम पंचायत के कर्मियों ने पिछले 17 माह से उसकी पेंशन बंद कर दी है। सरपंच एवं सचिव से पूछने पर उन्होंने जनपद काार्यालय डिंडौरी से पेंशन बंद होने की जानकारी दी। इस पर वह वहां भी पति को लेकर पहुंची थी लेकिन वहां किसी ने उसकी एक नहीं सुनी।

साधन विहीन है वन ग्राम सारसताल

जानकारी के अनुसार दो दिन पूर्व कलेक्ट्रेट में मायाराम उर्फ माया सोनवानी नामक अपने दिव्यांग पति को गोद मे उठाकर कलेक्ट्रेट पहुंची। महिला के साथ उसके दो बच्चे भी थे। यह महिला जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर बन ग्राम सारसताल से आई थी। घने जंगल से घिरे इस गांव से मुख्य मार्ग तक वाहन (साधन)के लिए सोनवानी को कई किलोमीटर का सफर पति को गोद में लेकर ही तय करना पड़ा। बहरहाल किसी तरह वह कलेट्रेट पहुंच ही गई थी।