युवराज के प्रति कठोर था क्योंकि कुछ साबित करना था: योगराज

युवराज के प्रति कठोर था क्योंकि कुछ साबित करना था: योगराज

मुंबई। युवराज ंिसह के पिता योगराज ंिसह ने मंगलवार को स्वीकार किया कि वह कभी कभी अपने बेटे के प्रति कठोर थे क्योंकि वे कुछ साबित करना चाहते थे और उन्हें हमेशा अपने बेटे पर गर्व रहेगा। युवराज ने सोमवार को उतार चढ़ाव से भरे अपने अंतरराष्ट्रीय कॅरियर का अंत किया। इस दौरान उनके कॅरियर का सर्वश्रेष्ठ लम्हा 2011 विश्व कप में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाना रहा। भारत के लिए एक टेस्ट और छह एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले योगराज ने कहा कि मैं कृतज्ञ हूं कि मेरा उसके जैसा बेटा है। मैं धन्यवाद देता हूं और मैं हमेशा उसे युवराज कहता हूं कि मुझे उस पर गर्व है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर तुम्हें (युवराज) लगता है कि मैं तुम्हारे प्रति कठोर था, मैं लोगों को कुछ साबित करना चाहता था और मैं उम्मीद करता हूं कि तुम इसे समझ सकते हो।’ युवराज के अपने पिता के साथ रिश्ते काफी अच्छे नहीं थे और बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि वह उसके लिए ‘ड्रैगन’ की तरह थे। अंतरराष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लेने से ठीक पहले हालांकि युवराज अपने पिता के साथ सुलह करने में सफल रहे। योगराज ने कहा कि शुरुआती दिनों में वह हमेशा चाहते थे कि युवराज ‘बंबई’ जाए। उन्होंने अपने और अपने बेटे के कॅरियर में मदद के लिए जाने माने लेखक मकरंद वायंगणकर का भी आभार जताया। युवराज को जब राष्ट्रीय टीम में जगह मिली तब चयनकर्ता की भूमिका निभा रहे पूर्व भारतीय बल्लेबाज चंदू बोर्डे ने इस क्रिकेटर को निडर व्यक्ति करार दिया जो अन्य लोगों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल शारीरिक समस्याओं के बावजूद उसने स्वयं को जिस तरह फिट रखा और उन समस्याओं से उबरा, उसके लिए उसे सलाम है। उसने दूसरों को दिखाया कि कभी हार नहीं माननी चाहिए और अंत तक उसने संघर्ष जारी रखा। उसने देश और अपने राज्य के लिए जिस तरह का प्रदर्शन किया, उस पर मुझे खुशी है।’’