आउटडोर एक्टिविटी की कमी बच्चों को बना रही है मायोपिका का शिकार

आउटडोर एक्टिविटी की कमी बच्चों को बना रही है मायोपिका का शिकार

मां -बाप कृपया ध्यान दें। यह बहुत जरूरी है कि आपके बच्चे सारा दिन घर- घुसरू बनकर टीवी, कंप्यूटर या फिर मोबाइल से न चिपके रहें बल्कि कम से कम एक या दो घंटे बाहर जाकर जरूर खेलें। अगर बच्चे ऐसा नहीं करते तो आने वाले समय में वे मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष का शिकार हो सकते हैं। दरअसल, आउटडोर रोशनी ही इस समस्या का एकमात्र कुदरती और आसान हल है। आस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलोजी के स्कॉट रेड बताते हैं-पिछले समय की तुलना में आजकल के बच्चे इनडोर वीडियो गेम्स आदि खेलते हुए अधिकांश समय घर के अंदर बिताते हैं, यही समस्या की जड़ है। याद कीजिये पुराने समय में स्कूलों में करवाये जाने वाले सूर्य नमस्कार। उनका मकसद यही था। बच्चों का आउटडोर लाइट से आमना-सामना और आंखों की रोशनी का तंदुरुस्त रहना। उस समय में बच्चे स्कूल से आते ही बाहर खेलने चले जाते थे। और अनजाने में ही वे ज्यादा समय आउटडोर लाइट के संपर्क में रहते थे। आज हर दूसरा या चौथा बच्चा इस बीमारी का शिकार है। अगर आपके बच्चे भी मायोपिया नामक समस्या से जूझ रहे हैं तब भी आप उनको आउटडोर लाइट में ज्यादा से ज्यादा ले जाकर उनकी बीमारी काफी हद तक कम कर सकते हैं। बस जरूरत है अपने बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की। छुट्टियों में उन्हें घुमाने के लिए बाहर लेकर जायें। महीने में एक या दो बार आउटडोर पिकनिक जरूर करें। और हर रोज सुबह उठकर उनके साथ पार्क में जाने की आदत डाल लें तो वह तो सबसे उम्दा इलाज है।