जाम्बिया में आज भी चलता है ‘मोगैंबो खुश हुआ’ चीन की सीता भागवत गीता पढ़ने सीख रहीं हिंदी

जाम्बिया में आज भी चलता है ‘मोगैंबो खुश हुआ’ चीन की सीता भागवत गीता पढ़ने सीख रहीं हिंदी

 प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आए 66 से ज्यादा देशों के प्रवासी भारतीय जहां रह रहे हैं, वहां भारतीय संस्कृति को बनाए और बचाए हुए हैं। अफ्रीकी देश जाम्बिया और फिजी जैसे बेहद कम आबादी वाले देशों में भारतीय संस्कृति के हिसाब से उत्सव और त्योहार मनाए जा रहे हैं तो चीनी नागरिक सिंगापुर में रहते हुए भगवत गीता पढ़ने के लिए हिंदी के ट्यूशन ले रहे हैं।

जाम्बिया : बॉलीवुड पसंद

जाम्बिया से आए मंदसौर के पंकज माहेश्वरी ने बताया कि पिछले 18 साल से जाम्बिया में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और सीईओ आॅफ टेक्सला अमेरिकन यूनिवर्सिटी में काम कर रहा हूं। पंकज बताते हैं कि जाम्बिया के लोग बॉलीवुड के दीवाने हैं। मोगैंबो खुश हुआ वाला डायलॉग वहां आज भी फेमस है। वहां बॉलीवुड की मूवी अंग्रेजी में डब करके देखी जाती हैं। 

सिंगापुर : भारत जैसा ही

आॅस्ट्रेलिया से आर्इं भावना शिवानंद कर्नाटक मूल की निवासी हैं। वे 14 साल तक सिंगापुर में रहने के बाद पिछले 10 महीनों से आॅस्ट्रेलिया शिफ्ट हुई हैं। कहती हैं कि सिंगापुर में रहते हुए कभी नहीं लगा कि भारत से बहुत दूर हैं, क्योंकि हम सभी त्योहार वहां भी मनाते हैं। सिंगापुर में दिवाली पर दो दिन की छुट्टी होती है। सरकार सजावट और इवेंट भी करवाती है। वह खुद भी कार्यक्रमों में शामिल होती है

चीन : हिंदुत्व में विश्वास

मूलरूप से चीन की रहने वाली 55 साल की सीता सिंगापुर से इस इवेंट में शामिल होने पहुंचीं हैं। कहती हैं कि मैंने भारत के बारे में बहुत निगेटिव चीजें सुन रखी थीं, लेकिन मोदीजी के आने के बाद बहुत बदलाव आए हैं। 7 बार भारत आ चुकीं सीता हिंदुत्व में विश्वास रखती हैं और भगवत गीता पढ़ती हैं। इसके लिए वह हफ्ते में एक बार एक घंटे का प्राइवेट ट्यूशन लेती हैं। उनके टीचर हिंदुस्तानी हैं।

फिजी : हिंदुस्तानी रिवाज

सुमंत कुमार राउत ओडिशा के मूल निवासी हैं, लेकिन 2013 से फिजी में रह रहे हैं। वहां प्रिंटिंग एंड पैकेजिंग का काम करते हैं। 8 लाख आबादी वाले फिजी में करीब 35 प्रतिशत भारतीय रहते हैं। सुमंत बताते हैं कि फिजी में गणेशोत्सव और दुगार्पूजा जैसे आयोजनों में हिंदुस्तानी अपना रिवाज नहीं भूले हैं। यहां तक कि नॉनवेज तक नहीं खाते हैं। शादियों की रस्में भी पूरी की जाती हैं।