शहर में 15 रैन बसेरे, फिर भी गरीबों की ठंडी रातें गुजर रहीं फुटपाथ पर

शहर में 15 रैन बसेरे, फिर भी गरीबों की ठंडी रातें गुजर रहीं फुटपाथ पर

जबलपुर । कहने को नगर निगम सीमा में 15 रैनबसेरे नगर निगम ने बना दिए हैं मगर इनमें गरीबों,लावारिशों और सड़क किनारे रात बिताने वालों को आश्रय आसान नहीं है। हां यदि कोई व्यापारी है और गांठ का पूरा है तो उसे महीनों के लिए आसानी से कमरे और अन्य सुविधाएं मुहैया करवा दी जाती हैं। गरीबों को रोड किनारे रात बिताने से बचाने और रैनबसेरा तक पहुंचाने का काम जिस एनजीओ को दिया गया है उसके पास समय ही नहीं है कि वह गरीबों को रात में ढूंढकर रैनबसेरा पहुंचाए। राजा गोकुलदास के महलनुमा भवन में बने 28 कमरों में से ज्यादातर कमरे भरे नजर आए। एक कमरे में बाहर से परीक्षा देने आए कुछ छात्र बैठे थे। जिन्होंने बताया कि हमसे 25 रुपए प्रति पलंग के हिसाब से पैसे लिए गए हैं। इस कमरे में पलंग व गद्दे तो नजर आए मगर चादर या तकिया नहीं थे। ऊपर की मंजिल पर कुछ खानाबदोश नजर आने वाले पुरुष व महिलाएं दिखीं जिन्होंने बताया कि हर व्यक्ति से 6 रुपए लिए गए हैं। एक छोटे से कमरे में 11 लोग रह रहे थे। इसमें ओढ़ने-बिछाने के लिए कुछ नहीं दिया जाता। इनके पास अपने खुद के बिस्तर थे।

कमरे में भरे थे कंबल

नीचे ही एक कमरे में ठसाठस नए कंबल भरे थे। यह कमरा एक व्यापारी ने करीब डेढ़ महीने से किराए पर लिया हुआ था। उससे पूछे जाने पर जानकारी दी कि हमने 25 रुपए प्रति पलंग के हिसाब से 4 पलंग के 100 रुपए प्रतिदिन दिए हैं। नियमानुसार धर्मशाला में 3 दिन से अधिक रुकने का प्रावधान नहीं है मगर डेढ़ महीने से यह व्यापारी अपने पूरे माल सहित कब्जा जमाए था।

ऐसे भी गरीब

राजा गोकुलदास धर्मशाला व रैनबसेरा का संचालन करने वाली कर्मचारी संतोष तिवारी से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि सड़क किनारे रात बिताने वाले रैनबसेरा आना नहीं चाहते। इन्हें लाने की जवाबदारी जिस एनजीओ की है उसने आज तक एक भी गरीब को यहां नहीं लाया है। विगत वर्ष कुछ लोगों को लाया गया था तो ज्यादातर शराब के नशे में धुत थे,उन्हें हमने कमरा दिया और गद्दे-पल्ली भी दिए मगर कुछ ही देर में गायब हो गए।