एक साल में बाघों के हमले में 15 ग्रामीणों की मौत, वजह- कोर एरिया छोड़ बाहर निकल रहे

एक साल में बाघों के हमले में 15 ग्रामीणों की मौत, वजह- कोर एरिया छोड़ बाहर निकल रहे

जबलपुर। टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में बाघों की हो रही लगातार मौत और बाघों के इंसानों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जो चिंता का विषय है। कारण, महाकोशल- विंध्य के कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना और संजय दुबरी नेशनल पार्कों में टाइगर की संख्या साल- दर- साल बढ़ रही है, लेकिन इनके एरिया में कोई वृद्धि नहीं हुई। इससे बाघ और अन्य वन्यप्राणी पार्क से सटे गांवों में घुस रहे हैं। एक साल में 15 ग्रामीणों की हमलों में और 55 बाघों की मौत आपसी संघर्ष में हुई है। पार्कों के कोर और बफर एरिया में 400 से अधिक गांव: पांचों नेशनल पार्कों के कोर और बफर में 400 से अधिक गांव हैं। यहां आए दिन ग्रामीणों पर बाघों के हमले के मामले सामने आ रहे हैं।

इतने बाघों ने तोड़ा दम

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 22, कान्हा टाइगर रिजर्व में 12, पन्ना टाइगर रिजर्व में 4, सिवनी वनक्षेत्र में 1, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 2 बाघों की मौत आपसी संघर्ष में हुई है। इसके अलावा शहडोल वनक्षेत्र में 3, संजय दुबरी, नौरादेही और पेंच टाइगर रिजर्व में 2-2, जबकि बालाघाट, अब्दुल्लागंज, छिंदवाड़ा, मंडला और चित्रकूट के जंगलों में भी 1-1 बाघ की मौत हुई है।

मर जाएंगे, गांव नहीं छोड़ेंगे

बांधवगढ़ के कोर एरिया में गढ़पुरी समेत 12 गांवों का विस्थापन होना है। इसकी प्रक्रिया के तहत सरकार परिवार के हर वयस्क को 15-15 लाख रुपए और जमीन दे रही है, लेकिन ग्रामीण गांव छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। गढ़पुरी के ग्रामीण राममिलन यादव, किशोरी पाल का कहना है कि हम जंगल में ही रहेंगे। हमारा सबकुछ यहीं हैं। अब हम दूसरी जगह नहीं जाएंगे, चाहे हमारी जान भी चली जाए।

बाघों के हमले में मौत

  • बांधवगढ़: एक साल में 10 लोगों की मौत बाघ के हमले में और 5 ग्रामीण घायल हुए है। 
  • कान्हा : एक साल में एक ग्रामीण की मौत और एक घायल हुआ है। 
  • पेंच : तीन ग्रामीण घायल हुए। इसमें एक की मौत हो गई। 
  • पन्ना और संजय दुबरी पार्क: एक-एक मौत बाघ के हमले में मौत। 
  • घुंघुटी वन परिक्षेत्र: महुआ बीनने गई महिला पर बाघ ने हमला कर दिया। घटनास्थल पर ही मौत।

पार्क प्रबंधन विस्थापन के लिए वन विभाग मुख्यालय को गांवों की सूची देता है। बांधवगढ़ में 16 गांवों को विस्थापित कराने की प्रक्रिया 2005- 06 से शुरू हुई थी। अब तक चार गांवों को विस्थापित किया गया है। - अर्पित मिराज, एसडीओ, ताला पतौर रेंज, बांधवगढ़

बाघों के बीच फाइटिंग वाइल्ड लाइफ का एक अहम हिस्सा भी है, क्योंकि नए बाघों को भी अपनी टेरेटरी बनानी होती है। बाघ के क्षेत्र का निर्धारण उसे उपलब्ध होने वाले शिकार पर निर्भर करता है। - असीम श्रीवास्तव, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ मप्र, भोपाल

टाइगर रिजर्व और अन्य क्षेत्रों में इंसान और बाघों के संघर्ष प्रबंधन को प्रभावी रूप से लागू करने फॉरेस्ट अफसरों को समय निकालना होगा। रिजर्व में रहने वाले ग्रामीणों का विश्वास हासिल कर उनको फिर से स्थापित करना होगा। - अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट भोपाल