5 स्थानों पर 18 गायकों ने किशोर के गीतों की दी संगीतमय प्रस्तुति

5 स्थानों पर 18 गायकों ने किशोर के गीतों की दी संगीतमय प्रस्तुति

सावन की भीगी शाम में हरफनमौला गायक कलाकार किशोर कुमार के नगमें जब शहर के पांच स्थानों पर गूंजे तो पूरा शहर किशोरमय हो गया और श्रोताओं के जेहन में संगीत के गोल्डन एरा की यादें ताजा हो गईं। अवसर था, संस्कृति विभाग की ओर से प्रदेश में जन्मे गायक किशोर कुमार की जन्मस्मृति पर आयोजित ये शाम मस्तानी... कार्यक्रम का, जो भोपाल में पांच स्थानों पर एक साथ आयोजित हुआ। भानपुर स्थित पीपुल्स विश्वविद्यालय में आलाप भट्ट, राजेश भट्ट, डॉ. देव, असलम हमदुले, त्रिषा सिंह और श्रीजा उपाध्याय ने गीतों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर गीतों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स व फैकल्टी मेंबर मौजूद रहे और हॉल खचाखच भरा रहा। इस संगीयमय शाम में पीपुल्स यूनिवर्सिटी की प्रो चांसलर डॉ. मेघा विजयवर्गीय, पीपुल्स ग्रुप के डायरेक्टर मयंक विश्नोई व रजिस्ट्रार डॉ. नीरजा मलिक उपस्थित रहीं। गायकों ने हवा के साथ-साथ...,जीवन के सफर में राही... जैसे सुपरहिट गीतों की प्रस्तुति दी गई। इस मौके पर डॉ. मेघा विजयवर्गीय की फरमाईश पर गायक कलाकारों ने प्यार हमें किस मोड़ पर ले आया... गीता सुनाया। इस प्रस्तुति में तबला पर वेदांत शर्मा, की-बोर्ड पर मोहम्मद अजहर अली, ढोलक पर मोहम्मद मेहरुद्दीन, आॅक्टोपैड पर मोहम्मद रेहान और गिटार पर विष्णु ने संगत। लगभग दो घंटे चली संगीतयम प्रस्तुतियों पर श्रोता झूम उठे।

कॉलेजों में दी गईं प्रस्तुतियां

बैरागढ़ स्थित साधु वासवानी कॉलेज में भोपाल के गायक कलाकार संजीव शर्मा, शैल कुमार, हसीब अंसारी, महेश रूपानी, रूपा और नीलम ने गीतों की प्रस्तुति दी। भेल स्थित कॅरियर कॉलेज में सुनील शुक्रवारे और पूर्वी सुहास ने किशोर कुमार के सुरीले नगमें सुनाए। उन्होंने मेरे दिल में आज क्या है..., जाने जा ढूंढ़ता ही रहा...,जैसे गीत गाए। पं. खुशीलाल आयुर्वेदिक कैंपस में डॉ. राजेश कुमार, राजेन्द्र, गीतिका, संदीपा पारे एवं मिहिका मालवीय ने किशोर कुमार के यादगार गीतों की प्रस्तुति दी।

रवींद्र भवन में गूंजा मुसाफिर हूं यारों...

‘ये शाम मस्तानी...’ कार्यक्रम के अंतर्गत रवींद्र भवन में मुंबई के सुप्रसिद्ध गायक कलाकार देबोजीत साहा व साथियों ने किशोर कुमार के नगमों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया। इस दौरान संचालक, संस्कृति अदिति कुमार त्रिपाठी, उप-संचालक वंदना पांडे, सहायक संचालक वंदना जैन मौजूद रहीं। साहा ने फूलों के रंग से..., घुंघरू की तरह..., मुसाफिर हूं यारों... जैसे गीत सुनाएं।

पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर था, फिर सब कुछ छोड़ कर म्यूजिक का हाथ थामा : देबोजीत साहा

मैं हमेशा से सिंगर ही बनना चाहता था फिर मैं और मेरी पत्नी असम से मुंबई आ गए। जहां मैंने काफी स्ट्रगल किया और फिर सारेगामापा में मुझे मौका मिला, जिसमें विनर बनने के बाद तो देश-विदेश में मेरे शो होने लगे, इसके अलावा में बिग बॉस में भी गया और करीब 2 महीने तक वहां रहकर आया। यह कहना था, बॉलीवुड सिंगर देबोजीत साहा का। जो कि गुरुवार को रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम के लिए भोपाल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने आईएम भोपाल से खास बातचीत में जीवन से जुड़े कई अनुभव शेयर किए। देबोजीत कहते हैं कि असम के सिलचर जिले से मैंने गाने की शुरुआत की थी। इसके बाद मैंने संगीत सीखना शुरू किया और फिर मैं सिविल इंजीनियरिंग में गया और पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट में मैंने सिविल इंजीनियर के रूप में काम किया। लेकिन मुझे गाने का बहुत शौक था, तो फिर सब कुछ छोड़कर म्यूजिक पर ही फोकस किया। मुझे लगता है कि रियलिटी शो में वास्तविक टैलेंट ही आता है, जो छोटे से छोटे व्यक्ति को बड़ा प्लेटफार्म देता है। हमारे देश में बहुत टैलेंट है, हजारों की संख्या में सिंगर घूम रहे हैं, जरूरत है उन्हें एक सही मार्गदर्शन और एक अच्छा प्लेटफार्म मिलने की।