19 हजार रोजगार सहायक सचिवों को नहीं मिल रहा उचित मानदेय कर रहे अधिक काम

19 हजार रोजगार सहायक सचिवों को नहीं मिल रहा उचित मानदेय कर रहे अधिक काम

जबलपुर । केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का ठीक तरह से क्रियान्वयन करने सहित लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिले। इसके लिए ग्राम पंचायतों में दिनरात काम करने वाले ग्राम रोजगार सहायक सचिवों को 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी नियमित नहीं किया जा रहा है। साथ ही डायरेक्ट सेवा समाप्त कर दी जाती है या फिर इन्हे जनपद पंचायत के अधिकारियों द्वारा छोटी-छोटी बातों पर हटा दिया जाता है। जिसके कारण रोजगार सहायक सचिवों में आक्रोश है। मध्यप्रदेश में 19 हजार रोजगार सहायक सचिव कार्यरत है। जिसमें से करीब 15 सौ से अधिक रोजगार सहायक सचिवों को उनकी छोटी-छोटी गलतियों या फिर काम समय पर पूरा नहीं हो पाने के कारण उच्च अधिकारियों द्वारा हटा दिया जाता है। उच्च अधिकारियों की प्रताड़ना और अधिक काम कराए जाने के कारण करीब 1 हजार ग्राम सहायक रोजगार सचिव काल के गाल में समां चुके हैं । इनमें से कुछ फांसी लगा ली तो कुछ की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। वर्तमान में कार्यरत ग्राम रोजगार सहायक सचिव से भी कोरोना योद्धा के साथ-साथ ग्राम पंचायतों में होंने वाली विभिन्न योजनाओं सहित अन्य कार्य कराए जा रहे है। जिससे रोजगार सहायक सचिव परेशान हैं।

सीएम ने की थी घोषणा

सहायक रोजगार कर्मचारी संघ मध्यप्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2018 में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में करीब एक हजार ग्राम रोजगार सहायक सचिवों को भोजन कराया था और घोषणा की थी कि रोजगार सहायक सचिवों को निलंबन की अवधि में भी वेतन दिया जाएगा। इनके साथ किसी भी तरह की ज्यादती नहीं होंने दी जाएगी। परंतु सीएम की घोषणा के बाद भी निलंबन की अवधि में भी रोजगार सहायक सचिवों को न तो कोई मानदेय दिया जा रहा है ना ही नियमित और उनकी मांगों का निराकरण किया जा रहा है। वहीं अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास विभाग मनोज श्रीवास्तव ने भी कहा था कि रोजगार सहायक सचिवों की डायरेक्ट सेवा समाप्त न करके उन्हे अर्थदंड दिया जाए।

कोरोना काल में ड्यूटी करते समय मौत

प्रदेशभर के ग्राम रोजगार सहायक सचिव कोरोना संक्रमण काल में कोरोना योद्धा की भांति शासन प्रशासन के निर्देश पर कार्य कर रहे हैं। इनकी सेवाएं ग्राम पंचायतों के कामकाज के अलावा चेक पोस्ट पर भी ली जा रही है। अभी हाल ही में मंडला के ग्राम पंचायत जमुनिया में रोजगार सहायक सचिव की डोभी चेक पोस्ट में ड्यूटी लगाई गई थी जहां पर ड्यूटी के दौरान रास्ते में रोजगार सहायक राजेश कुमार यादव की मौत हो गई थी। परंतु शासन ने अभी भी इनके परिवार को न तो बीमा की राशि प्रदान की। ना ही किसी भी सदस्य को कोई नौकरी दी। इसी तरह कोरोना काल में ड्यूटी करते समय रायसेन जिले के भी एक रोजगार सहायक सचिव की मौत हो चुकी है। लेकिन पीड़ित परिवार को कोई मदद नहीं मिली है।