खजुराहो के ‘आदिवर्त’ के लिए जनजातीय संग्रहालय में बन रही 192 फीट लंबी पेंटिंग

खजुराहो के ‘आदिवर्त’ के लिए जनजातीय संग्रहालय में बन रही 192 फीट लंबी पेंटिंग

 विदेशी पर्यटकों को मध्यप्रदेश की हजारों वर्ष पुरानी जनजातीय सभ्यता और संस्कृति से रूबरू कराने के लिए खजुराहो में संस्कृति विभाग द्वारा जनजातीय आवास बनाए जा रहे हैं। मप्र संस्कृति विभाग के जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी भोपाल द्वारा इस जनजातीय गांव को बसाया जा रहा है। जनजातीय संग्रहालय के प्रभारी अशोक मिश्रा ने बताया कि ‘आदिवर्त’ जनजातीय लोक कला संग्रहालय के परिसर से लगी लगभग 4 एकड़ जमीन पर आवास बनाए जा रहे हैं। खजुराहो एक विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र है। इसी दृष्टि से पर्यटकों को प्रदेश की जनजातीय एवं जनपदीय संस्कृति से अवगत कराने के लिए ‘आदिवर्त’ जनजातीय लोक कला संग्रहालय का विस्तार किया जा रहा है। भोपाल के जनजातीय संग्रहालय में पद्मश्री दुर्गा बाई व्याम इस आदिवर्त के लिए 192 फीट लंबाई व 12 फीट चौड़ाई की विशाल पेंटिंग चार माह से तैयार कर रही हैं। इसमें अभी लगभग एक महीने का काम बाकी है।

उपयोगी सामग्रियों का होगा प्रदर्शन

संग्रहालय में प्रदेश की 7 प्रमुख जनजाति गोंड, बैगा, कोरकू, भील, भारिया, सहरिया और कोल के पारंपरिक जनजातीय आवासों का संयोजन किया जा रहा है। यह परिकल्पना एक जनजातीय गांव की तरह परिकल्पित की जा रही है। इसमें जनजातियों के रहनसह न, आवासों की अलंकारिकता, उपयोगी सामग्रियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इन सभी घरों में दीर्घाएं बनाई जाएंगी।

प्रदेश के पांच लोकांचल की झलक देखने को मिलेगी

प्रदेश के पांचों लोकांचल बुंदेलखंड, निमाड़, मालवा, बघेलखंड और चंबल की जनपदीय संस्कृति के पारंपरिक आवासों को भी विस्तारित किया जाएगा। संग्रहालय में प्राचीन सभ्यता को साक्षात मूल स्वरूप में दर्शक देख सकेंगे। इसी के साथ यहीं पर स्थित ‘आदिवर्त’ जनजातीय लोक कला संग्रहालय में रखी विभिन्न जनजातियों द्वारा बनाई गई हस्तशिल्प से भी परिचित हो सकेंगे। खासतौर पर विदेशी पर्यटक एक ही स्थान पर पूरे प्रदेश के आदिवासी कल्चर को समझ सकेंगे।

पेंटिंग में नर्मदा यात्रा का होगा वर्णन

खजुराहो में निमार्णाधीन 'आदिवर्त' जनजातीय एवं लोक कला संग्रहालय के लिए पद्मश्री दुर्गा बाई नर्मदा उत्पत्ति, उसके तटों जनजीवन एवं धार्मिक महत्व के स्थानों का चित्रण अपनी शैली में कर रही हैं। यह वुडन पेंटिंग लगभग 192 फीट लंबी है। पेंटिंग में मप्र में नर्मदा नदी के किनारे बने मंदिर को उकेरा रहीं हैं साथ ही जनजातीय रहन-सहन को दिखाया है। अशोक मिश्रा, क्यूरेटर, जनजातीय संग्रहालय