कैफे कॉफी डे के संस्थापक के खाते से 2,000 करोड़ गायब

कैफे कॉफी डे के संस्थापक के खाते से 2,000 करोड़ गायब

नई दिल्ली। कैफे कॉफी डे (सीसीडी) संस्थापक वीजी सिद्धार्थ की मौत के बाद उनके बैंक खातों से 270 मिलियन डॉलर (करीब 2,000 करोड़ रुपए) गायब हुए हैं। कॉफी डे एंटरप्राइजेज लिमिटेड के बोर्ड की जांच में ये खुलासा हुआ है। वी जी सिद्धार्थ की बीते साल जुलाई में मौत हो गई थी। कर्नाटक पुलिस की जांच में बताया गया था कि उन्होंने नदी में कूदकर आत्महत्या की थी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार मामले से सीसीडी से जुड़े लोगों का कहना है कि उनके खातों से कम से कम 2,000 करोड़ गायब हैं। सिद्धार्थ की आत्महत्या के बाद सीसीडी के वित्तीय लेनदेन और उनकी दर्जनों निजी कंपनियों की जांच की गई थी। सौ पन्नों की मसौदा रिपोर्ट जल्द ही जारी होने की उम्मीद है, जिसमें कॉफी श्रृंखला के वित्तीय लेनदेन और उनकी स्वामित्व वाली दर्जनों निजी कंपनियों के लेन देन की जानकारी है। कंपनी के सामने कारोबार चालू रखने की चुनौती कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि जांच रिपोर्ट अभी फाइनल नहीं है। ऐसे में यह रकम अभी बदल सकती है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि मैनेजमेंट और सिद्धार्थ के परिवार की प्राथमिकता चुनौतीपूर्ण माहौल में कारोबार को चालू रखना और सभी हितधारकों की प्रतिबद्धताओं को पूरा करना है। उनके सामने सीसीडी से जुड़े 30,000 लोगों की नौकरियां बचाने का भी सवाल है।

मौत से पहले सिद्धार्थ ने खत में लिखी थी आर्थिक चुनौतियों की बात

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद और भारत में कॉफी रेस्तरां के सबसे बड़े चेन कैफे कॉफी डे के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ 29 जुलाई, 2019 की रात कर्नाटक के तटीय शहर मंगलुरु जाने के दौरान लापता हो गए थे। अपने ड्राइवर से टहलने की बात कहकर वो निकले थे और करीब 36 घंटे बाद उनकी लाश मिली थी। कर्नाटक पुलिस ने बाद में बताया था कि कैफे कॉफी डे (सीसीडी) संस्थापक वीजी सिद्धार्थ की फॉरेंसिक रिपोर्ट से उनके आत्महत्या करने की पुष्टि हुई थी।

आत्महत्या के बाद सामने आया था खत

सिद्धार्थ का एक खत भी उनकी मौत के बाद सामने आया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि एक उद्यमी के तौर पर मैं विफल रहा। मैं उन सभी लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने के लिए माफी मांगना चाहता हूं, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया। लंबी लड़ाई के बाद आज मैं हिम्मत हार रहा हूं क्योंकि मैं निजी इक्विटी साझेदारों में से 1 की तरफ से शेयर वापस खरीदे जाने का और दबाव नहीं झेल सकता हूं।