2 साल में 5 पुल धराशायी, ठेकेदारों और इंजीनियरों पर कार्रवाई तक नही

 17 Sep 2020 01:57 AM  5

 भोपाल ।  मप्र में 2 साल में 5 पुल धराशायी हो गए। जांच की औपचारिकताएं हुर्इं, लेकिन इंजीनियर-ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई। कूनो नदी का पुल 3 महीने में ध्वस्त हो गया, यही हाल वैनगंगा नदी के पुल का हुआ। हादसों में सरकार के करोड़ों रुपए पानी में बह गए, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं हुई। प्रदेश में पिछले पखवाड़े भारी बारिश से छिंदवाड़ा में पेंच नदी व सिवनी जिले में वैनगंगा नदी पर निर्मित पुल धराशायी हो गए। हलालखुर्द व बेलपेठ के बीच पेंच नदी पर 4.27 करोड़ से यह पुल 4 साल पहले ही बनाया था। बाढ़ में इसके 7 पिलर्स नदी में बह गए। इसमें मटेरियल घटिया स्तर के पाए गए। इसका लोकार्पण 2017 में सीएम के हाथों कराया गया था। मंदसौर जिले में चंबल नदी का सीतामऊ-चौमेला पुल पिछले साल 14 सितंबर को ढह गया था। 9 साल पहले 8 करोड़ से निर्मित इस पुल में क्या खामी मिली, अब तक पता नहीं चला। भिंड जिले के ग्राम फूप में उमरी का पुल 5 साल पहले ध्वस्त हुआ था, लेकिन जांच में किसे दोषी पाया गया, यह रहस्य ही है।

 उद्घाटन से पहले ही पुल हुआ ध्वस्त 

वैनगंगा नदी पुल हादसा तो चौंकाने वाला है। बरबसपुर-सुनवारा-अमनाला मार्ग पर 4 करोड़ की लागत का यह पुल उद्घाटन के पहले ध्वस्त हो गया। जून 2020 में निर्माण पूरा हुआ और 27 अगस्त की बारिश से पुल का ऊपरी हिस्सा बह गया। पुल प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बना था, इस मामले में मैदानी इंजीनियर निलंबित भी हुए हैं। इसी नदी पर 3.75 करोड़ से 8 साल पहले बना पीडब्ल्यूडी का पुल भी धराशायी हुआ, लेकिन इस मामले में भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। 100 दिन पूरे नहीं कर सका : श्योपुर-ग्वालियर-शिवपुरी को जोड़ने वाले कूनो नदी के पुल की कहानी भी ऐसी ही है। 2 साल पहले 8 करोड़ के इस पुल का धूमधाम से उद्घाटन हुआ, लेकिन 100 दिन भी पूरे नहीं कर सका। पहली बारिश में 4 स्पान बह गए। जांच समिति ने तकनीकी रिपोर्ट में मटेरियल अच्छा पाया और हादसे को प्राकृतिक आपदा मान लिया। वहीं, कटनी मैहर मार्ग पर पुल निर्माण के दौरान ही उसका स्लैब धराशायी हो गया।

 जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रहा ढहऊ, मान ली प्राकृतिक आपदा बिना परीक्षण क्लीनचिट 

विभागीय विशेषज्ञों का कहना है कि पुल निर्माण के समय बारिश और बाढ़ की स्थिति का पूर्व आंकलन और मजबूती का ध्यान रखते हैं। सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ, लेकिन जिम्मेदारी किसी की तय नहीं हुई। दो मामलों में तो जांच समिति द्वारा निर्माण सामग्री (गिट्टी, सीमेंट, रेत और सरिया) आदि का परीक्षण कराए बिना क्लीनचिट दे दी गई। 

फिर कराई जाएगी तकनीकी छानबीन

पुल क्यों धराशायी हुए, इसके तकनीकी कारणों की छानबीन फिर से कराई जाएगी। डिजाइन अथवा मटेरियल की खामी होगी, इतनी जल्दी पुल नहीं गिरते। प्रदेश में कई पुल तो 50-100 साल पुराने भी खड़े हैं। - गोपाल भार्गव, मंत्री लोक निर्माण विभाग