बच्चेदानी के आॅपरेशन सहित 87 पशुओं की इमरजेंसी सर्जरी कर बचाई गई जान

बच्चेदानी के आॅपरेशन सहित 87 पशुओं की इमरजेंसी सर्जरी कर बचाई गई जान

जबलपुर । कोरोना आपातकाल में नानाजी देशमुख वेटरनरी विज्ञान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने घायल टाइगर से लेकर हाथी के बच्चे एवं गाय के सींग का केंसर व एक श्वान की बच्चेदानी में फंसा बच्चे का आॅपरेशन कर डिलेवरी कराई गई। साथ ही 87 इमरजेंसी श्वानों, वन्यजीवों की सर्जरी कर उनकी जान बचाई गई। गौरतलब है कि वीयू के कुलपति एसपी तिवारी के निर्देश पर वेटरनरी हॉस्पिटल व एसडब्ल्यूएफएच सेंटर में बनाए गए कंट्रोल रूम से लॉकडाउन के बीच टाइगर रिजर्व में घायल वन्यजीवों को न सिर्फ उपचार दिया गया, बल्कि वहां पर पीएम के दौरान आने वाली समस्याओं को आॅनलाइन से दूर किया गया। वहीं वेटरनरी हॉस्पिटल में 90 दिनों में 1 हजार 86 बीमार श्वानों घोड़े,गाय,बैलों का उपचार किया गया। इनमें कुछ की इमरजेंसी में चिकित्सकों ने सर्जरी की तब कहीं इनकी जान बचाई जा सकी।

46 पशुओं के हुए एक्सरे

वेटरनरी हॉस्पिटल की समन्वयक डॉ.अपरा शाही ने बताया कि 20 मार्च से 24 जून तक की अवधि में 46 एक्स-रे किए गए। ये एक्स-रे श्वान, बिल्ली, गाय, बैल सहित अन्य ऐसे पशुओं के किए गए। जिनके शरीर की हड्डी फेक्चर हो गई थी। जिनका एक्स-रे कराकर उन्हे उपचार देकर ठीक किया गया।

इन टाइगर रिजर्व व नेशनल पार्कों को दी आॅनलाइन मदद

1. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व

2. पेंच टाइगर रिजर्व

3. वन विहार नेशनल पार्क

4. बुरहानपुर वन विभाग

5. छतरपुर वन विभाग

6. माधव नेशनल पार्क

7. बैतूल वन विभाग

8. ह्युमन फारेंसिक लेबोरेटरी भोपाल

टेलीफोनिक कंसलटेंसी से भी किया समाधान

कोरोना आपातकाल में वेटरनरी के वैज्ञानिकों से प्रदेशभर के नेशनल पार्क व टाइगर रिजर्व के साथ फॉरेस्ट के अफसरों ने अपने यहां पर होने वाली वन्यजीवों की मौत के बाद पीएम व घायल जानवरों के बेहतर उपचार के लिए वेटरनरी डॉक्टर्स को वीयू के एक्सपर्टस् ने टेलीफोनिक कसंलटेंसी देकर वन्यजीवों के उपचार में मदद की। वीयू के एसडब्ल्यूएफएच सेंटर की ओपीडी में सर्प, वार्किंग डियर, बंदर, बतख उपचार के लिए पहुंचे, तो मोर,चमगादड़, सांभर, बंदर जैसे वन्यजीवों का पोस्टमार्टम भी किया गया।