27 साल पहले बनीं 90 दुकानें हो गर्इं 97 लेंटर तक तन गए जेडीए अंजान

27 साल पहले बनीं 90 दुकानें हो गर्इं 97 लेंटर तक तन गए जेडीए अंजान

जबलपुर । वर्ष1993 में जेडीए ने सिविक सेंटर में गुमटी नुमा 90 दुकानों का निर्माण गोलाई में किया था उस वक्त इन्हें 10 हजार रुपए की डाउन पेमेंट पर कुल 90 हजार कीमत में दिया गया था। 27 सालों में यहां के दुकानदारों ने जेडीए अधिकारियों की मिलीभगत से जमकर अनियमितताएं की हैं जिनसे जेडीए के जिम्मेदार अंजान हैं। यहां 90 की 97 दुकानें तो हो ही गई हैं साथ ही टीन शेड की जगह सभी दुकानदारों ने लेंटर तान लिए हैं कई दुकानें दो मंजिला हो चुकी हैं और कई ने 2 या 3 दुकानों को मिलाकर 1 दुकान बना ली है। ये दुकानें 6 वाई 8 फीट की थीं। इसे आवंटित करते समय जेडीए ने शर्तें भी रखी थीं। इनका पालन तो नहीं किया गया अलबत्ता उल्लंघन जमकर किया गया। दुकान संचालक खुले आम दुकानों का स्वरूप बदल रहे हैं। 9 दुकान संचालकों ने तो नया निर्माण करते हुए पक्का लेंटर भी डाल लिया है। अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं जिसका दुकानदार जमकर फायदा उठा रहे हैं।

आवंटन के समय ये थीं शर्तें

दुकानों के आवंटन के समय सभी को लिखित में अनुबंध करवाया गया था जिसमें शर्त थी कि कोई भी दुकान के मूल स्वरूप में बदलाव नहीं करेगा और न ही इसमें कोई अवैध निर्माण करेगा। दुकान के सामने अतिक्रमण नहीं जमाएगा। बिना अनुमति किसी तरह की मरम्मत भी नहीं की जा सकेगी। इन सभी शर्तों का जमकर उल्लंघन हो रहा है।

2 टॉयलेट गायब

जेडीए ने यहां 90 दुकानों के साथ 3 टॉयलेट का निर्माण भी कर वाया था। इ नमें से 2 टॉयलेट लापता हो गए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर कब्जे कर दुकान बना ली गई है। यहां 7-8 जगह कंजरवेंसी भी थी जो कि अब गायब हो गई है।

नोटिस का नहीं देते जवाब

दुकानों में किए गए फेरबदल की शिकायत जब जेडीए पहुंची तो जिम्मेदार अधिकारियों ने दुकानदारों को नोटिस जारी किए मगर इनका जवाब देन की जहमत दुकानदारों ने नहीं उठाई। यहां के 14 दुकानदारों ने दुकानें जोड़ कर एक की हैं। अधिकांश दुकानदारों ने अपनी मर्जी से दुकान में फेरबदल कर लिया है।

लॉकडाउन में करवा लिया निर्माण

लॉक डाउन पीरियड में जब सभी तरह के कामकाज बंद थे उस वक्त यहां के दुकानदारों ने चुपचाप दुकानों में फेरबदल कर लिया। इसकी भनक किसी को नहीं लग पाई। इसका भी नोटिस जेडीए ने भेजा था मगर जवाब नहीं दिया गया। निर्माण कार्य जरूर बंद करवा दिया है।

ननि को हस्तांतरण

इन दुकानों सहित सिविक सेंटर की इस योजना का हस्तांतरण नगर निगम को हो चुका है मगर नगर निगम केवल टैक्स वसूली करती है। अन्य अनियमितताओं से उसे कोई लेना-देना नहीं है। ननि अधिकारियों का कहना है कि यहां जो भी अवैध निर्माण हो रहा है उस पर कार्रवाई का अधिकार जेडीए के पास है।

इन दुकानों का बदला स्वरूप

55 व 56 नंबर की दुकान हो गई है एक

16 सी व 16डी दुकान को एक कर लिया गया है।

35 व 36 नंबर की दुकान हो गई है एक।

8,9 व10 नंबर की दुकानें 2 दुकान बन गई हैं।

2 दुकानों को तोड़कर नया निर्माण किया जा रहा है।

फैक्ट फाइल

1993 में हुआ था दुकानों का निर्माण

90 दुकानें बनकर हुई थीं तैयार

97 हो गई है दुकानों की संख्या

30 साल के लिए दी गई थीं लीज पर

3 टायलेट बनाए थे 2 हो गए गायब।