95 वर्षीय शंभू जयसिंघाणी दे रहे नि:शुल्क शिक्षा, आजादी की लड़ाई में कई बार गए जेल

95 वर्षीय शंभू जयसिंघाणी दे रहे नि:शुल्क शिक्षा, आजादी की लड़ाई में कई बार गए जेल

अखिल भारत सिंधी बोली ऐं साहित सभा के तत्वावधान में सुहिण सिंधी अवॉर्ड समारोह का आयोजन रविवार को शिवाजी नगर स्थित सिंधु भवन में किया गया। यह कार्यक्रम हर साल देश के विभिन्न शहरों में होता है, लेकिन भोपाल में इस कार्यक्रम का आयोजन करीब दो दशक के बाद हुआ है। समारोह में शामिल होने नई दिल्ली से आए 95 वर्षीय सभा के अध्यक्ष शंभू जयसिंघाणी को विशेष सम्मान दिया गया। जयसिंघाणी एक स्वतंत्रता सेनानी है, जिन्होंने कराची में स्वतंत्रता की लड़ाई अंग्रेजों से लड़ी और कई बार जेल गए। श्री जयसिंघाणी की तबीयत ठीक नहीं थी और उन्हें बुखार था लेकिन सिंधी साहित्य के प्रति उनका प्रेम उन्हें भोपाल तक ले आया।

समारोह में कविता इसराणी के निर्देशन में नाटक पोस्टकार्ड का मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मप्र मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष मनोहर ममताणी और विशेष अतिथि राजेंद्र मनवाणी, साबू रीझवाणी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक अशोक मनवाणी ने बताया कि समारोह में सिंधी साहित्य, संगीत, रंगमंच और सिंधी पत्रकारिता के क्षेत्र में श्रेष्ठ योगदान देने वाले आठ विभूतियों को चार रुपए के पुरस्कार दिए गए, जिसमें से छह शख्सियत मौजूद रहीं।

इन विभूतियों को मिला अवॉर्ड 

अदीब अवॉर्ड जयपुर के भगवान अटलाणी, संगीत अवॉर्ड नागपुर की मंजूश्री आसुदाणी, पत्रकारिता अवॉर्ड भोपाल के ज्ञानचंद लालवाणी, फनकार अवॉर्ड भोपाल के प्रताप राय तनवाणी, चित्रकला अवॉर्ड रमेश नानवाणी, ड्रामा अवॉर्ड नागपुर के किशोर लालवाणी को अखिल भारत सिंधी बोली ऐं साहित सभा महासचिव अंजली तुलसियानी ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में अंजली तुलसियानी ने कहा 1957 के बाद नई चेतना का संचार सिंधी साहित्य में हुआ और तब से लगातार हम सक्रिय हैं।

एक पोस्टकार्ड ने बदल दी बच्चे की जिंदगी

समारोह के दौरान नाटक पोस्टकार्ड का मंचन किया गया। इस नाटक की कहानी लेखक के घर आए एक पोस्टकार्ड से शुरू होती है। पोस्टकार्ड एक बच्चे का था, जिसने लेखक से मदद मांगी कि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मेरी पढ़ाई रूक गई है। लेखक इस दुविधा में है कि वह उस बच्चे की मदद करे या नहीं। अंत में करीब बीस साल बाद जब वह बच्चा बड़ा होकर कलेक्टर बनता है, तब वह अपनी इस कामयाबी के बारे में सबको बताता है।

जरूरतमंदों की मदद करके मिलती है संतुष्टि

समर्पण वेलफेयर एनजीओ के जरिए गरीब कन्याओं की शादी, जरूरतमंदों को राशन समेत काम की चीजें देकर संतुष्टि मितली है। अखिल भारत सिंधी बोली ऐं साहित सभा से मैं पिछले पांच सालों से जुड़ी हुई हूं। - अंजली तुलसियानी, महासचिव, साहित सभा

पाकिस्तान से 1946 में आ गया था भारत

मैं 1942 में पाकिस्तान कराची में रहता था, तब अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी। इस दौरान कई बार जेल जाना पड़ा। देश के विभाजन से एक साल पहले 1946 में अपने परिवार के साथ कराची छोड़कर राजस्थान आ गया। 1957 में दिल्ली आने के बाद सिंधी बंधुओं के साथ ऑल इंडिया सिंधी बोली कन्वेंशन शुरू किया। इसके बाद से सभा द्वारा दो स्कूलों में हजारों बच्चों नि:शुल्क पढ़ाया जा रहा है। -शंभू जयसिंघाणी, समाजसेवी