25 छात्रों का समूह बना लावारिस मवेशियों का सहारा

25 छात्रों का समूह बना लावारिस मवेशियों का सहारा

ग्वालियर। एक घायल गाय के इलाज से शुरू हुआ काम अब 25 सदस्यों तक बढ़ चुका है और समूह ने अब तक 200 से ज्यादा पशुओं का इलाज कराया है। छात्रों का यह समूह ‘लावारिस का सहारा’ गु्रप के नाम से जाना जाता है। हाईवे पर अक्सर घायल अवस्था में आवारा पशु नजर आ जाते हैं, जिन्हें देखकर भी अधिकांश लोग बिना कोई ध्यान दिए निकल जाते हैं। क्योंकि, यह किसी के पालतू नहीं होते हैं, जिससे इन्हें इलाज भी नहीं मिल पाता है। कई जानवर बीमारी और घायल अवस्था में मर जाते हैं। लेकिन ‘लावारिस का सहारा’ गु्रप के सदस्यों द्वारा ऐसे घायल मवेशियों को उचित इलाज मुहैया करवाया जाता है। गु्रप से जुडेÞ सदस्य हाईवे सहित अन्य स्थानों पर किसी मवेशी के घायल पड़े होने की सूचना मिलने पर तुरंत पहुंच जाते हैं, जो उसे उपचार प्रदान करने के साथ ही पूरी तरह से स्वस्थ होने तक उसकी देखभाल करते हैं।

घायल गाय को देख आया विचार

गु्रप को राहुल यादव और पुष्पेंद्र यादव द्वारा 28 सितंबर 2021 को ही शुरू किया गया है, लेकिन वह करीब दो वर्षों से लावारिस मवेशियों को उपचार मुहैया करवाते आ रहे हैं। राहुल बताते हैं कि एक बार आंतरी रेलवे क्रॉसिंग से निकलते समय वहां घायल गाय नजर आई, जिसके दोनों पैर मुड़े होने से वह चलने-फिरने में लाचार थी, उसका इलाज करवाया, जिससे वह स्वस्थ हो गई। इसके बाद से यह सेवा कार्य शुरू हो गया। ग्रुप से अब करीब 25 सदस्य जुड़ चुके हैं, जिनमें से अधिकांश स्टूडेंट हैं। ग्रुप में वेटनरी डॉक्टर गगन, ऋषि व शेखर तोमर हैं। शेखर का काम घायल जानवर की सूचना मिलने पर एम्बुलेंस पहुंचाना है। डॉ. गगन बिना कोई शुल्क लिए इलाज करते हैं। इलाज में लगने वाली दवाओं का खर्च स्टेट सायबर सेल में आरक्षक पुष्पेंद्र यादव उठाते हैं, इसके अलावा कुछ समाजसेवी भी मदद कर देते हैं।