एक आदिवासी गांव ऐसा, जहां 100 से अधिक डॉक्टर, हर घर से सरकारी नौकरी में

एक आदिवासी गांव ऐसा, जहां 100 से अधिक डॉक्टर, हर घर से सरकारी नौकरी में

भोपाल। प्रधानमंत्री ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मंत्र भले ही अब दिया हो, लेकिन मप्र के धार जिले के कुच्छी विधानसभा का आदिवासी ग्राम पडियाल दशकों पहले अपने बूते आत्मनिर्भर बन चुका है। इस गांव में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जिसमें लोग सरकारी नौकरी में न हों। दो किमी के दायरे में 11 टोलों में बसे 6 हजार की आबादी वाले इस गांव में 100 से अधिक डॉक्टर, 200 गजटेड आफिसर और क्लास- 1 श्रेणी के करीब 100 अधिकारी हैं। अंग्रेजों के जमाने में 1918 में यहां दो कमरों में स्कूल शुरू हुआ था। अब वह स्कूल हायर सेकंडरी तक अपगे्रड हो गया है। इसमें आसपास के गांव के बच्चे भी पढ़ने आते हैं।

हमारे गांव में पढ़ाई को धर्म की तरह मानते हैं

हमारे गांव में पढ़ाई को धर्म की तरह मानते हैं। लड़के-लड़कियां भूखे रहकर भी पढ़ाई करते हैं। गांव से अंग्रेजों के जमाने से ही पांचवीं पास लोगों ने सरकारी नौकरी शुरू की थी। आज हर घर से कोई न कोई नौकरी में है।

खेतों में काम के साथ हमने पढ़ाई भी की

हमारे समय मिडिल स्कूल ही था, लेकिन माता पता ने पढ़ाई को ही प्राथमिकता दी। स्कूल समय के बाद खेतों में काम करते थे। परेशानी का दौर तो था, लेकिन पैरेंट्स बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित और मदद करते थे।