कोरोना के इलाज में आयुष दवाएं होती हैं कारगर: एम्स

कोरोना के इलाज में आयुष दवाएं होती हैं कारगर: एम्स

भोपाल। कोरोना से पूरी दुनिया प्रभावित हो चुकी है। संक्रमण के दौरान कई दवाओं का परीक्षण किया गया, वैक्सीन भी तैयार हो चुकी है। इसके बावजूद कोरोना के मरीज मिल रहे हैं। कोरोना के इलाज में एलोपैथी के साथ आयुष दवाएं भी कारगर हुई हैं। यह खुलासा भोपाल एम्स में कोरोना के दौरान मरीजों पर हुए आयुष दवाओं के एक अध्ययन में हुआ है। जानकारी के मुताबिक अध्ययन में सामने आया कि कोरोना के इलाज और उससे बचाव में आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथिक दवाएं ज्यादा कारगर साबित हुई हैं।

एम्स में शुरू होगा एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट कोर्स

एम्स के ट्रॉमा एंड इमरजेंसी मेडिसिन विभाग द्वारा 22-24 सितंबर तक एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट कोर्स आयोजित किया जा रहा है। मप्र में यह पहला मौका है जब इस अंतरराष्ट्रीय कोर्स के लिए वर्कशॉप का आयोजन होगा। इसका उद्देश्य आघात (ट्रॉमा) का प्रबंधन करने के लिए स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर को बेहतर ढंग से तैयार करना है। यह कोर्स गंभीर चोटों के प्रारंभिक जांच और उसके इलाज की समीक्षा करता है, जिसकी मदद से रोगी में अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे।

2 दिन पहले हो गए स्वस्थ

रिसर्च में सामने आया कि जिनको कोरोना मरीजों को आयुष दवाई दीं तो वह एलोपैथी दवाएं लेने वाले मरीजों की तुलना में जल्दी ठीक हुए। आयुष दवाओं से मरीज 2.29 दिन पहले ठीक हो गया। यही नहीं, आयुष दवा से मरीजों का बुखार जल्दी ठीक हुआ, वहीं कफ भी ज्यादा तेजी से सूख रहा था।

22,864 मरीजों पर हुआ अध्ययन

शोधकर्ता एम्स के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी आयुष डॉ. दानिश जावेद ने बताया अध्ययन के लिए 22,864 कोरोना रोगियों को शामिल किए गया। उन्होंने बताया कि आयुष विभाग में मेटा विश्लेषण (कई डेटा को एक सॉटवेयर से आकलन करना) किया गया। शोध के अनुसार, आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्ध व होम्योपैथिक दवाएं कोरोना के प्रबंधन में प्रभावी पाई गईं। डॉ. दानिश जावेद, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (आयुष), डॉ. आशीष कुमार दीक्षित, चिकित्सा अधिकारी (होम्योपैथी), डॉ. सुखेश मुखर्जी (सहायक प्रोफेसर, जैव रसायन), डॉ. सना अनवर (पीएचडी छात्रा, सामुदायिक चिकित्सा) व डॉ. निभा गिरी, चिकित्सा अधिकारी (होम्योपैथी) शोध का हिस्सा थे। यह शोध हाल ही में मेडिकल जर्नल में भी प्रकाशित हुआ है।

आयुष दवाओं से नहीं हुए साइड इफेक्ट

शोध के अनुसार जिन मरीजों का इलाज आयुष पद्धति से किया गया उन मरीजों में इलाज के बाद एडवर्स इफेक्ट यानी दवाओं के साइड इफेक्ट ना के बराबर थी। वही एलोपैथिक दवाओं के बाद कुछ मरीजों को परेशानियों के मामले सामने आए थे।

रिसर्च कोरोना बीमारी शुरू होने से फरवरी 2022 तक उपलब्ध शोध पत्रों के आधार पर किया गया।

जिन मरीजों को आज दवाई दी गई उनका सिटी स्कोर भी तेजी से ठीक हुआ।

आयुष दवाओं से फेफड़ों में संक्रमण सहित अन्य समस्याएं अपेक्षाकृत जल्दी ठीक हुई।