मरीज को ले जाने के बाद फोन पर कहा- हमारे पास डॉक्टर नहीं, स्टेबल कर भेजो, दो घंटे बाद पीपुल्स अस्पताल की पार्किंग में मृत छोड़ गए

मरीज को ले जाने के बाद फोन पर कहा- हमारे पास डॉक्टर नहीं, स्टेबल कर भेजो, दो घंटे बाद पीपुल्स अस्पताल की पार्किंग में मृत छोड़ गए

भोपाल। मालवीय नगर स्थित पीपुल्स अस्पताल से कोविड पॉजिटिव मरीज वाजिद अली को ले जाकर लगभग पौने दो घंटे बाद मृत अवस्था (ब्राट डेड) में अस्पताल के बाहर पटके जाने के मामले में कोविड डेडिकेटेड चिरायु अस्पताल प्रबंधन का अमानवीय चेहरा और सफेद झूठ सामने आया है। सीएमएचओ आॅफिस के निर्देश के बाद चिरायु ने पीपुल्स अस्पताल से मरीज की पूरी जानकारी लेने के बाद उसे लेने के लिए एंबुलेंस भेजी थी। लेकिन चिरायु का मेडिकल स्टाफ 1 घंटे 39 मिनट बाद वाजिद अली के शव को वापस पीपुल्स अस्पताल के गेट के सामने जमीन पर डालकर भाग निकला। लगभग पौने दो घंटे तक मरीज कहां रहा, और कोविड डेडिकेटेड अस्पताल होने के बाद भी नॉन कोविड अस्पताल के बाहर शव क्यों डाल डाल गए, इन सवालों के जवाब मांगने पर चिरायु अस्पताल के डॉ. आशुतोष मंगलगिरि ने फोन काट दिया।

चिरायु को अच्छा अस्पताल सोचकर रेफर कराया था, हम गलत थे

हमें सोमवार दोपहर 1 बजे बंसल अस्पताल से यह खबर आई थी कि वालिद साहब पॉजिटिव आए हैं। हमसे 1250 (सीएमएचओ ऑफिस) द्वारा पूछा गया कि कहां रेफर करें। हमें लगा कि चिरायु अच्छा अस्पताल है तो हमने वहां रेफर कराने का फैसला लिया। शाम 4:30 बजे खबर मिली कि उन्हें चिरायु ले जाने की प्रक्रिया प्रोसेस में है और 5 बजे पता चला कि वालिद साहब की ऑक्सीजन मेंटेन कर रहे हैं। पिता उस समय ठीक थे। पीपुल्स अस्पताल से जाने के बाद उन्हें 2 घंटे तक चिरायु की एंबुलेंस लेकर कहां घूमती रही हमें कुछ पता नहीं चला। चिरायु भेजने का हमारा फैसला गलत था।