उम्र 49 साल साइकिल से 13 दिन मेें पूरी की कन्याकुमारी तक 2300 किमी यात्रा

उम्र 49 साल साइकिल से 13 दिन मेें पूरी की कन्याकुमारी तक 2300 किमी यात्रा

 अगर ठान लो तो किसी का साथ मिले न मिले अपनी हिम्मत और जज्बा साथ देने लगता है। यह कहना है, बीएचईएल में कार्यरत कर्मचारी प्रदीप कुमार ओरिया का, जो मंगलवार साइकलिंग करते हुए भोपाल से कन्याकुमारी पहुंचे। 49 वर्षीय प्रदीप ने 13 दिनों में 2300 किलोमीटर की यह यात्रा अकेले ही पूरी की। प्रदीप कहते हैं, मैं अकेला ही घर से निकला और मेरे साथ कोई क्रू नहीं था। हालांकि जब मैंने परिवार को अपने यह विचार बताया तो वे मेरे इस अकेले सफर को लेकर चिंतित हुए। इतने लंबे अकेले सफर में मुझे कोई भी बुरा अनुभव नहीं हुआ और मुझे मेरा देश 6 राज्यों से गुजरते हुए सुरक्षित लगा। मैं मप्र के बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना ,आंध्र प्रदेश और आखिरी में तमिलनाडु में पहुंचा जहां कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुंचा।

मैं रोजाना घर से दμतर भी साइकिल से 10 किमी आता-जाता हूं। भोपाल में मुझे कभी किसी काम के लिए अकेले जाना होता है तो साइकिल से ही जाता हूं। इससे पहले भोपाल से अहमदाबाद, बनारस व लखनऊ की यात्रा कर चुका हूं। अपने रिश्तेदारों में मिलने साल में कई बार साइकिल से ही इंदौर आता-जाता हूं।

पूरी यात्रा में आया 10 हजार रुपए का खर्च

प्रदीप कहते हैं, सुबह 5 बजे से लेकर 5.30 बजे तक साइकलिंग करता था और फिर किसी पेट्रोल पंप या पुलिस स्टेशन में अपना टेंट लगाकर रात गुजारता था। गूगल मैप की मदद से मैंने अपना रास्ता प्लान किया। रात गुजारने व नहाने व तैयार होने की 90 फीसदी सुविधाएं पेट्रोल पंप पर मिल गई और बाकी जगहों पर पुलिस ने मुझे अपना टेंट पुलिस स्टेशन में लगाने दिया। मैं अपनी साथ टेंट, स्लीपिंग बैग, फर्स्ट एड किट, साइकिल पर रेडियम, लाइट, बैक ब्लिंकिंग लाइट और कॉस्ट्यूम में निकला। मुझे इस सफर की प्रेरणा अपना एक पैर खो चुकी पर्वतारोही अरूणिमा सिन्हा से मिली जो अंटार्कटिका पर चढ़ने वाली पहली भारतीय विकलांग महिला का खिताब जीत चुकी हैं। पूरी यात्रा में मेरा सिर्फ 10 हजार रुपए का खर्चा हुआ।