जबलपुर के रीतेश के कलेक्शन में 1897 का एंटीक कैमरा

जबलपुर के रीतेश के कलेक्शन में 1897 का एंटीक कैमरा

जबलपुर। शहर में ऐतिहासिक चीजों को कलेक्ट करने वालों की कमी नहीं है। ऐसे ही एक शख्स जो पेशे से निजी स्कूल में टीचर हैं और उनके पास इंग्लैंड का 1897 का कैमरा कलेक्शन में है। पटरी पर चलने वाले इस 5 फीट के कैमरे के अलावा माचिस की डिब्बी के बराबर कैमरा भी उनके संग्रह में है। पुराने कैमरे संग्रह करने वाले रीतेश कुमार दास के अनुसार उन्होंने 30 साल पहले ऐतिहासिक वस्तुओं को कलेक्ट करना शुरू किया था। शुरू में यह शौकिया था जो अब आदत बन गया है। अन्य शहरों में या कहीं नीलामी में कुछ ऐतिहासिक चीज उन्हें नजर आती हैं तो वे उसे हासिल कर लेते हैं।

अब तक 3 लाख खर्च

दास ने अब तक 3 लाख से अधिक की राशि ऐतिहासिक वस्तुओं को खरीदने में खर्च कर दी है। उन्होंने 5 फीट ऊंचा 6 फीट लंबा और 18 फीट पटरी पर चलने वाला 1930 का कैमरा न्यूजीलैंड से 10 हजार रुपए में बुलवाया था। 1940 माचिस की डिब्बी बराबर कैमरा वे 25 हजार में मुम्बई से लाए थे। इसके अलावा उनके पास डॉ. राधा कृष्णन की जबलपुर यात्रा की ब्लैक एंड वाइट फोटो, आर्य समाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद सरस्वती के जबलपुर आगमन का 1881 की फोटो भी है।

देश-विदेश में प्रदर्शन

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में कैमरा प्रदर्शनी में साल 2012 में भाग लिया था। इसके अलावा भोपाल के साइंस सेंटर में 2016 में, 2018 में नेहरू साइंस सेंटर, मुम्बई और पिछले वर्ष जबलपुर के रानी दुर्गावती संग्रहालय में भी प्रदर्शनी आयोजित की थी। रीतेश का कहना है कि पुरानी चीज समय काल की कला संस्कृति और सभ्यता बताती है। उस समय के कारीगर साधारण औजारों से इतनी सुंदर चीजें बनाते थे कि वर्तमान में आधुनिक औजारों से भी इसका निर्माण संभव नहीं है। ऐतिहासिक वस्तुएं युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन रही हैं।

दादाजी से मिली प्रेरणा

रीतेश ने बताया कि उनके दादाजी एचसी दास साल 1963 जबलपुर में डिप्टी कलेक्टर रहे हैं और उन्हें भी पुरानी वस्तुओं को संग्रहित करने का शौक रहा है। जब उन्होंने दादा जी का संदूक खोला तो उनके संग्रह से एंटीक कलेक्शन करने की प्रेरणा मिली।