कलाकारों ने बनाई 6 फीट की राखी, मप्र के बाग और बटिक फेब्रिक से भी बनीं राखियां

कलाकारों ने बनाई 6 फीट की राखी, मप्र के बाग और बटिक फेब्रिक से भी बनीं राखियां

रक्षाबंधन 11 अगस्त को मनाया जाएगा और रविवार से शहर में राखी की खरीदारी का माहौल दिखने लगा है। राखी को लेकर अब कई तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं ताकि बहनों को भाइयों की कलाईयों पर सजाने का नया लुक व डिजाइन दिया जा सके। भोपाल में मप्र की पहचान धार का बाग प्रिंट और उज्जैन के बटिक प्रिंट है, जिससे इस बार राखी तैयारी की गई है। यह पहला मौका है, जबकि कलाकार बाग व बटिक की राखियां तैयार करके लाए हैं। इसके अलावा जूट से बनी रंग-बिरंगी राखियां तो वहीं गोबर व भूसी मिलाकर राखियां तैयार की गईं हैं जो कि ईको-फ्रेंडली राखी हैं। इसके अलावा फेब्रिक राखी के भीतर बीजों को डाला गया है ताकि लैंडफील्ड में जाने पर मिट्टी के गमलों में इन्हें डालने पर इनके भीतर से पौधा उगे। इसके अलावा राखियों पर नेचुरल कलर्स किए गए हैं।

गौहर महल में ईको-फ्रेंडली राखी

प्रीति सिसौदिया और प्रभात सिसौदिया इस बार गौहर महल में ईको-फ्रेंडली राखी की लंबी रेंज लेकर आए हैं जिसमें सबसे अनूठी राखी 6 फीट की है जिसे उन्होंने एक महीने में तैयार किया। इस राखी को कार्ड-बोर्ड के ऊपर बनाया गया है और इसे कुंदन, स्टोन्स व बीड वर्क से सजाया गया है। इसके सर्किल का व्यास 2 फीट है और बाकी रेशन की डोरी मिलाकर यह 6 फीट को है। प्रभात कहते हैं, हमने चंदन की लकड़ी के टुकड़ों व गोबर से राखी बनाई है। इसके अलावा बाग व बटिक प्रिंट को बेस में लगाकर राखी तैयार की है जो कि काफी पसंद की जा रही है। ईको-फ्रेंडली राखियों पर कलर करने के लिए रोली, फूलों के रंग व सिंदूर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

गोबर शिल्प और क्रोशिया से बनाई

वहीं आनलाइन स्टोर्स पर राखी को काफी नए ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है जिसमें एक बॉक्स के भीतर कोकोपीट, मिट्टी का गमला, रोली-अक्षत के साथ क्रोशिया, जूट, फ्रेबिक व बांस से बनी राखी रखी जा रही है जिसके भीतर अलग-अलग तरह के फूलों के बीज दिए जा रहे हैं। राखी पुरानी होने पर इसे निकालकर साथ में दिए जा रहे पॉट में डालने पर इसके भीतर से बीज निकलेगा जो कि पौधा बनेगा। इस तरह की राखियों का कंसेप्ट लोगों को पसंद आ रहा है।

फेब्रिक राखी जिसके साथ कोकोपीट, पॉट और राखी के भीतर बीज होते हैं।

बेटी के साथ बना रहीं हूं

हर्षा भटनागर अपनी बेटी प्रशा के साथ घर पर ही राखी बना रही हैं। वे कहती हैं, मैं रेशम व कपड़े के इस्तेमाल से राखी बना रही हूं ताकि डिस्पोज होने पर यह नुकसानदायक न हो। इस काम में मेरी बेटी भी साथ दे रही है। अब लोग ईको- फ्रेंडली राखी को काफी खुश होकर लेते हैं।