नाटक से हिंदी के प्रति कर रहे जागरूक, तो कुछ अपनी मूल भाषा से हटकर लिख रहे किताबें

नाटक से हिंदी के प्रति कर रहे जागरूक, तो कुछ अपनी मूल भाषा से हटकर लिख रहे किताबें

 हिंदी का देश की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में एक अहम स्थान है, जिसके विकास के लिए सरकार समेत कई अन्य संस्थाएं भी अपना सहयोग प्रदान कर रही हैं। ऐसे में शहर की कई संस्था व लोग हैं जो कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रहे है। कोई आॅनलाइन क्लास से विदेश में रह रहे लोगों को हिंदी की जानकारी दे रहा है, तो कोई कार्यक्रम में माध्यम से देशभर के लोगों को हिंदी सीखा रहे हैं। तो कोई मूल भाषा से हटकर हिंदी भाषा में लेखन कर रहा हैं। राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर ऐसे ही लोगों से रूबरू कर रहे हैं

देशभर के युवाओं को हिंदी भाषा से जोड़ रहे

राजभाषा समिति के राजेश रंजन ने बताया कि पिछले 11 साल से तूर्यनाद कार्यक्रम के माध्मय से हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए काम किया जा रहा है। इसमें देशभर के युवाओं को जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि हर साल साउथ के लगभग 10 युवाओं को हिंदी भाषा के प्रति जोड़ते है। साथ ही देशभर से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। ऐसे छात्र, जिनकी प्रथम भाषा हिंदी नहीं है, को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनकी इन परेशानियों को दूर करने के लिए प्रतिवर्ष कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। इस कार्यशाला में उन्हें सामान्य, प्रतिदिन प्रयोग की हिंदी, व्याकरण तथा कुछ शब्दों के अर्थ भी बताए जाते हैं। एक सोशल मीडिया पर ग्रुप हैं, जिसमें 400 युवा हिंदी को प्रमोट करने का काम कर रहे हैं।

अमेरिका में कर रहे हिंदी का प्रचार-प्रसार

रंगकर्मी अमीय मेहता कहते हैं कि भारत से बाहर रहने वाले भारतीय अपनी भाषा के प्रति ज्यादा लगाव महसूस करते हैं। अमेरिका में रहते हुए मैं यहां हिंदी के प्रचार-प्रसार में निरंतर 10 वर्षों से कार्य कर रहा हूं। पिछले करीब 10 सालों में मैंने और मेरी टीम ने 30 से अधिक हिंदी नाटकों के 100 से ज्यादा प्रदर्शन अमेरिका के विभिन्न शहरों में किए हैं। नाटक को हिंदी भाषी दर्शकों और अंग्रेजी भाषा बोलने वाले दर्शकों ने भी सराहा है। साथ ही 6 लघु नाटक हिंदी में मैंने लिखे हैं, इसका प्रदर्शन भी किया गया है।

हिंदी भाषा में काम करना गौरव की बात

कथाकार रंजना चितले कहती हैं कि मेरी मातृभाषा मराठी है, लेकिन मप्र में जन्म होने और हिंदी भाषी प्रदेश में रहने के साथ मेरे मन मस्तिष्क में जो विचार आते है वो हिंदी में आते हैं। मेरे मन में जो विचार, भाव और कल्पनाशक्ति निर्मित होती है उसे मैं हिंदी में ही अच्छे से प्रस्तुत कर सकती हूं। यही कारण है कि मैंने हिंदी भाषा में काम करने का निर्णय लिया। हिंदी में काम करना मेरे लिए गौरव की बात है। मैंने हिंदी भाषा में ही अब तक 14 नाटक, 1 महानाट्य, 3 कहानी संग्रह, 1 उपन्यास और 5 अन्य किताबों का लेखन किया है।

इसलिए मनाया जाता है राष्ट्रीय हिंदी दिवस

प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। आजादी मिलने के बाद देश के सामने भाषा को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा था। क्योंकि भारत विभिन्नताओं का देश है। यहां कई भाषाओं बोली जाती हैं। भारत में सबसे ज्यादा आबादी द्वारा बोली, लिखी और पढ़ी जाने वाली हिंदी है। इसे ध्यान में रखते हुए संविधान सभा में एकमत के साथ 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। वहीं 14 सितंबर 1953 में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के सिफारिश के बाद से प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हमारी मातृ भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया था।